Wednesday, December 7, 2022
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पर्वतीय मेडिकल कॉलेजों में अब खत्म होगा प्रोफेसर्स का अकाल !

मैदान की अपेक्षा 50 फीसदी अधिक मिलेगा वेतन

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य को अस्तित्व में आए दो दशक का वक्त गुजर चुका है, लेकिन राज्य में शिक्षा और चिकित्सा जैसी समस्याएं आज पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हो गई हैं। जहां आम लोग पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन कर देहरादून ,हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे मैदानी क्षेत्रों को अपना स्थायी ठौर बना रहे हैं, वहीं सरकारी महकमों में वह चाहें शिक्षक हों या फिर डॉक्टर ज्यादातर मैदानों में ही डयूटी बजाना चाहते हैं। सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के इरादे से एक के बाद एक कई मेडिकल कॉलेज बनाने का ऐलान भी किया है, लेकिन वहां भी अस्पतालों की तरह फैकल्टी की समस्या से सरकार को दो चार होना पड़ रहा है।

चिकित्सा मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अब इस समस्या को दूर करने के लिए शिक्षा चिकित्सा मंत्री धनसिंह रावत ने नई पहल की है। अब पर्वतीय क्षेत्र में स्थित मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की नियुक्ति के इच्छुक प्रोफेसर्स को मैदान की अपेक्षा 50 फीसदी अधिक वेतन दिया जाएगा। इसके लिए मंत्रालय ने अलग से फंड बनाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है। अगले कुछ दिनों में इसका शासनादेश जारी होने की उम्मीद है। मंत्रालय को उम्मीद है कि इस पहल से पर्वतीय क्षेत्र में स्थित मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की समस्या खत्म हो जाएगा। अगर ऐसा होता है तो श्रीनगर, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज अगले कुछ समय में सुचारू रूप से संचालित हो पाएंगे।

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