सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी में एसआईटी जांच की मांग

Posted on 28 Sep 2018 -by Watchdog

नई दिल्ली। एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से स्वतंत्र जांच की मांग को खारिज कर दिया है। तीन जजों की बेंच ने एक के मुकाबले दो के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि एक्टिविस्टों की गिरफ्तारी केवल विरोध और विचारधाराओं में मतभेद के चलते नहीं हुई थी। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगले चार हफ्तों तक उनकी नजरबंदी जारी रहेगी।

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर ने कहा कि आरोपी न तो अपनी पसंद की जांच चुन सकता है और न ही गिरफ्तारी के तरीके को तय कर सकता है। मिश्रा की तरफ से फैसला लिखते हुए जस्टिस खानविलकर ने कहा कि कोई ऐसा खास तथ्य नहीं आया है जिसमें पुलिस की नीयत पर शक किया जा सके। मामले के आरोपी राहत पाने के लिहाज से कानून का दूसरा रास्ता भी अपना सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने दूसरी अदालत में जाने के लिहाज से उनकी नजरबंदी को चार हफ्ते के लिए बढ़ा दिया।

लेकिन तीसरे जज चंद्रचूड ने इन दोनों से बिल्कुल अलग रुख अपनाया। उन्होंने अपने नोट में कहा है कि मामले की स्वतंत्र जांच बहुत जरूरी थी। और ये एसआईटी के लिहाज से सबसे फिट केस है।

इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट की कार्यवाही जारी रहने के दौरान पुणे पुलिस द्वारा की गयी प्रेस कांफ्रेंस को भी गलत करार दिया। और उसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि “ये कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच गठित करने के लिए बिल्कुल उचित और फिट केस है। पुणे पुलिस का पूरा व्यवहार इस बात का अहसास कराता है कि जांच साफ-सुथरी नहीं है।” गिरफ्तार एक्टिविस्टों में सुधा भारद्वाज, वरवर राव, वरनन गोंजाल्वेस, अरुण फरेरा और गौतम नवलखा शामिल हैं।

आपको बता दें कि ये पांचों एक्टविस्ट अपनी 28 अगस्त की गिरफ्तारी के बाद से ही नजरबंद हैं। इन पर भीमा-कोरेगांव हिंसा में शामिल होने का आरोप लगा कर पुणे पुलिस ने इनको गिरफ्तार कर लिया था।

जस्टिस चंद्रचूड ने पुणे पुलिस की हरकतों को लेकर उसकी जमकर आलोचना की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मीडिया को बताया था कि आरोपी प्रधानमंत्री की हत्या की साजिश रच रहे थे। उन्होंने रिपब्लिक टीवी के उस फ्लैश की तरफ इशारा किया जिसमें उसने गिरफ्तारी के महीनों पहले बरामद किए गए एक पत्र को सुधा भारद्वाज के खिलाफ इस्तेमाल किया था। आरोपी के खिलाफ पेश किए गए पत्र की प्रमाणिकता संदेह के घेरे में है। उन्होंने महाराष्ट्र पुलिस द्वारा भविष्य में की जाने वाली जांच पर भी संदेह जाहिर किया। 

चंद्रचूड के मुताबिक गिरफ्तारी के पीछे मकसद बिल्कुल राजनीतिक है। उनका कहना था कि जो लोग किसी तरह का अलोकप्रिय सवाल उठा रहे हैं कोर्ट को उनकी स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के प्रति सतर्क रहना होगा। आवाजों को इसलिए नहीं दबा दिया जाना चाहिए क्योंकि वो विरोध में उठ रही हैं।

उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट स्वतंत्रता, सम्मान और विरोध के पक्ष में नहीं खड़ा होता है तो ये इन अधिकारों के लिए शांतिपाठ करने जैसा होगा।



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