कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले ऑफिसर विदेशी घोषित, परिवार समेत नज़रबंदी शिविर भेजा गया

Posted on 03 Jun 2019 -by Watchdog

गुवाहाटीः कारगिल युद्ध में शामिल रहे सेना के पूर्व अधिकारी मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित कर दिया गया है. इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर नज़रबंदी शिविर भेज दिया गया. पुलिस ने यह जानकारी दी है.

भारतीय सेना में तकरीबन 30 साल तक सेवाएं दे चुके कामरूप जिले बोको पुलिस थाना क्षेत्र के गांव कोलोहिकाश के निवासी मोहम्मद सनाउल्लाह को इसी जिले में कार्यरत विदेशियों के लिए बने न्यायाधिकरण (फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल) ने विदेशी घोषित किया. विदेशी घोषित होने के बाद सनाउल्लाह को परिवार सहित नज़रबंदी शिविर भेज दिया गया.

राष्ट्रपति पदक से सम्मानित मोहम्मद सनाउल्लाह इस समय असम सीमा पुलिस में सहायक उप-निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

उनका नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिंजन्स (एनआरसी) में नहीं हैं. विदेशी न्यायाधिकरण ने 23 मई को जारी आदेश में कहा कि सनाउल्लाह 25 मार्च, 1971 की तारीख से पहले भारत से अपने जुड़ाव का सबूत देने में असफल रहे हैं. वह इस बात का भी सबूत देने में असफल रहे कि वह जन्म से ही भारतीय नागरिक हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 52 वर्षीय सनाउल्लाह अगस्त 2017 में भारतीय सेना के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) कोर में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. उन्होंने विदेशी न्यायाधिकरण के समक्ष दिए बयान में कहा कि वह जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर के संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहे हैं.

विदेशी न्यायाधिकरण, कामरूप (ग्रामीण) ने इस साल 23 मई को सनाउल्लाह को विदेशी घोषित किया था. उनके परिवार के सदस्यों और वकील का कहना है कि सनाउल्लाह भारतीय नागरिक हैं और इसका पता उनके पूर्वजों के दस्तावेजों से आसानी से लगाया जा सकता है.

कामरूप जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीब सैकिया ने सनाउल्लाह को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि करते हुए कहा, ‘विदेशी न्यायाधिकरण ने उन्हें विदेशी घोषित किया है और हम कानून का पालन करेंगे.’

सैकिया ने बताया कि 2008 में सनाउल्लाह का नाम मतदाताओं की सूची में ‘डी’ (संदिग्ध) मतदाता के रूप में दर्ज किया गया था. उन्होंने बताया कि न्यायाधिकरण के फैसले के बाद पुलिस ने तय प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई करते हुए सनाउल्लाह को गोलपाड़ा के हिरासत शिविर में भेज दिया.

सनाउल्लाह के वकील सहिदुल इस्लाम ने कहा कि सनाउल्लाह को मंगलवार को हिरासत में लिए जाने के बाद उत्तरी गुवाहाटी में पुलिस हिरासत में रखा गया और उन्हें बुधवार दोपहर गोलपाड़ा के हिरासत केंद्र भेजा गया. उन्हें पिछले साल विदेशी न्यायाधिकरण से नोटिस मिला था और वह पहली बार 25 सितंबर, 2018 को न्यायाधिकरण के समक्ष पेश हुए थे.

सहिदुल का कहना है, ‘उन्होंने (सनाउल्लाह) अपने हलफनामे में कहा है कि वह 1987 में सेना में भर्ती हुए थे. मौखिक रूप से भी उन्होंने पूछताछ के दौरान सेना में भर्ती होने का साल 1987 बताया लेकिन अदालत के अधिकारियों द्वारा वह गलती से 1978 रिकॉर्ड हो गया. हमने उस वक्त इसका विरोध नहीं किया क्योंकि कोरे कागज पर उनके हस्ताक्षर लिए गए थे.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, सनाउल्लाह ने कहा, ‘उनका दिल टूट गया है. भारतीय सेना में तीस साल तक सेवा देने के बाद मुझे यह ईनाम मिला है.’

सनाउल्लाह ने शिविर में जाने से पहले पत्रकारों से कहा कि वह एक भारतीय नागरिक हैं और उनके पास नागरिकता संबंधी सभी आवश्यक दस्तावेज हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने देश की सेना में 30 वर्षों (1987-2017) तक इलेक्ट्रॉनिक और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के एक अधिकारी के रूप में सेवा की और 2014 में उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया.

उनकी बेटी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके पिता ने न्यायाधिकरण को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज दिए थे, जिसमें मतदाता कार्ड और पैतृक संपत्ति के दस्तावेज शामिल थे.

सनाउल्लाह के परिवारवालों ने बताया कि वह न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ गौहाटी उच्च न्यायालय में अपील करेंगे.



Generic placeholder image


राष्ट्रपति मेडल से सम्मानित पुलिस अधिकारी को आतंकियों के साथ पकड़ा गया
13 Jan 2020 - Watchdog

जेएनयू हिंसा फुटेज सुरक्षित रखने की याचिका पर हाईकोर्ट का वॉट्सऐप, गूगल, एप्पल, पुलिस को नोटिस
13 Jan 2020 - Watchdog

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष पर एफआईआर, हमलावर ‘संघी गुंडे’ घूम रहे हैं खुलेआम
07 Jan 2020 - Watchdog

‘जब CAA-NRC पर बात करने बीजेपी वाले घर आएं तो जरूर पूछिए ये सवाल’
23 Dec 2019 - Watchdog

भारत के संविधान के साथ अब तब का सबसे बड़ा धोखा है मोदी का नागरिकता कानून
21 Dec 2019 - Watchdog

नागरिकता कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन
19 Dec 2019 - Watchdog

नागरिकता क़ानून के विरोध की आग दिल्ली पहुंची, 3 बसों में लगाई आग
15 Dec 2019 - Watchdog

लोगों से पटी सड़कें ही दे सकती हैं सब कुछ खत्म न होने का भरोसा
14 Dec 2019 - Watchdog

नागरिकता कानून के खिलाफ मार्च कर रहे जामिया के छात्रों पर लाठीचार्ज
13 Dec 2019 - Watchdog

मोदी-शाह ने सावरकर-जिन्ना को जिता दिया गांधी हार गए
12 Dec 2019 - Watchdog

नागरिकता बिल देश के साथ गद्दारी है
12 Dec 2019 - Watchdog

नागरिकता बिल और कश्मीर पर संघी झूठ
11 Dec 2019 - Watchdog

विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश
09 Dec 2019 - Watchdog

जेएनयू छात्रों के मार्च पर फिर बरसीं पुलिस की लाठियां, कई छात्र गंभीर रूप से घायल
09 Dec 2019 - Watchdog

कालापानी को लेकर भारत के नेपाल से बिगड़ते सम्बंध
07 Dec 2019 - Watchdog

संविधान विरोधी नागरिकता बिल देश को बांटने
05 Dec 2019 - Watchdog

हरीश रावत का " उपवास " गॉधीवाद का भी घोर अपमान है
05 Dec 2019 - Watchdog

सत्ता की बौखलाहट का शिकार हुए पत्रकार शिव प्रसाद सेमवाल?
27 Nov 2019 - Watchdog

सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमानों के लिए बड़ी जीत है
10 Nov 2019 - Watchdog

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला समझना मेरे लिए मुश्किल: सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज
10 Nov 2019 - Watchdog

पुनरावलोकन : हिंसक समय में गांधी
02 Oct 2019 - Watchdog

भारत में अगले दो दशक बहुत अशांत और खूनी होंगे, जस्टिस काटजू
02 Oct 2019 - Watchdog

आरबीआई गवर्नर ने भी कहा - मंदी गहरा रही है
22 Aug 2019 - Watchdog

कश्मीर में नेताओं की गिरफ़्तारी पर डीएमके व अन्य विपक्षी पार्टियों ने जंतर मंतर पर किया विरोध प्रदर्शन
22 Aug 2019 - Watchdog

गहराता आर्थिक संकट भारत में फासीवाद की ज़मीन तैयार कर रहा है
16 Aug 2019 - Watchdog

खुली जेल में तब्दील हो गयी है घाटी, कश्मीरियों ने कहा-संविधान की भी इज्जत नहीं बख्शी
16 Aug 2019 - Watchdog

कश्मीर की जनता के समर्थन में प्रदर्शन को रोकने के लिए लखनऊ में रिहाई मंच के कई नेता हाउस अरेस्ट
16 Aug 2019 - Watchdog

जम्मू-कश्मीर: दलित आरक्षण पर मोदी-शाह ने बोला सफ़ेद झूठ, सच्चाई जानकर आप दंग रह जाएंगे
12 Aug 2019 - Watchdog

अनुच्छेद 370 खात्मे के खिलाफ नेशनल कांफ्रेंस ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
12 Aug 2019 - Watchdog

भारत अब किसी भी बड़े जनसंहार के लिए बिल्कुल तैयार है ?
11 Aug 2019 - Watchdog



कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले ऑफिसर विदेशी घोषित, परिवार समेत नज़रबंदी शिविर भेजा गया