राफेल फैसला: विशेषज्ञों ने कहा, संशोधित कैग रिपोर्ट का कोई प्रावधान-कोई चलन नहीं

Posted on 18 Dec 2018 -by Watchdog

नई दिल्ली: राफेल मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के पैराग्राफ 25 को लेकर विवाद जारी है. कोर्ट के फैसले में राफेल विमान सौदे पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक ऑडिट रिपोर्ट के बारे में लिखा गया है. हालांकि संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) और याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस मामले में कोई कैग रिपोर्ट पेश नहीं की गई है.

राफेल सौदे में विमान की कीमतों के बारे में हुए विवाद पर फैसले के 25वें पेज पर लिखा है,

‘कीमतों का विवरण नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) के साथ साझा की जा चुका है और कैग की इस रिपोर्ट को पब्लिक एकाउंट्स कमेटी (पीएसी) द्वारा जांचा जा चुका है. इस रिपोर्ट का एक संपादित अंश संसद के सामने रखा गया है और यह सार्वजनिक है.’

The pricing details have, however, been shared with the Comptroller and Auditor General (hereinafter referred to as“CAG”), and the report of the CAG has been examined by the Public Accounts Committee (hereafter referred to as “PAC”). Only a redacted portion of the report was placed before the Parliament, and is in public domain.”

इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद केंद्र ने बीते शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर कोर्ट के फैसले में उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में बात की गई है.

सरकार का कहना है कि उन्होंने कोर्ट में जो जानकारी दी थी उसका मतलब ये नहीं था कि ‘कैग रिपोर्ट को पीएसी द्वारा जांचा गया है’, बल्कि उसका मतलब ये था कि ‘कैग रिपोर्ट को पीएसी द्वारा जांचा जाएगा.’

हालांकि कई सारे विशेषज्ञों, कैग और संसद के अधिकारियों ने सरकार के दावे पर सवाल उठाया है और कहा कि कैग की केवल एक रिपोर्ट होती है, कभी भी इसका कोई संशोधित अंश नहीं पेश किया गया और न ही ऐसा करने का प्रावधान है.

लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘कैग रिपोर्ट को संशोधित करने का कोई प्रावधान नहीं है और न ही ऐसा कोई चलन है. संविधान के तहत कानून में ऐसी कोई चीज नहीं है.’

वहीं पूर्व उप कैग डॉ. बीपी माथुर ने कहा, ‘मैंने पहले कभी कैग की (संशोधित) रिपोर्ट के बारे में नहीं सुना है. कैग की केवल एक रिपोर्ट होती है जो कि संस्थान के ऑडिटर द्वारा तैयार किया जाता है और इसका उप कैग द्वारा निरीक्षण किया जाता है और खुद कैग द्वारा मंजूरी दिया जाता है.’

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च संस्था के चक्षु रॉय ने कहा, ‘संविधान में लिखा गया है कि कैग की रिपोर्ट्स संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा. लोकसभा के नियमों के मुताबिक सदन के पटल पर रखे गए सभी कागजात और दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाएगा.’

लोकसभा के एक पूर्व महासचिव ने नाम न लिखने के शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अभी तक कभी संशोधित रिपोर्ट नहीं पेश की गई है. ये हमारे सिस्टम में एक नया शब्द है. हो सकता है आने वाले समय में ऐसा हो.

वहीं पीडीटी अचार्य ने आगे कहा, ‘कैग की जो भी रिपोर्ट होती है, उसे संसद में पेश किया जाता है और फिर उसे पीएसी के पास भेजा जाता है. वित्त मंत्री सदन के पटल पर उस रिपोर्ट को रखते हैं. पीएसी को कैग द्वारा सहयोग किया जाता है. वास्तव में ये कहा जा सकता है कि कैग पीएसी का हिस्सा होता है.’

पीएससी के साथ 11 सालों तक काम करने वाले लोकसभा के पूर्व अतिरिक्त सचिव ने बताया, ‘पीएसी कैग की मदद से इसके रिपोर्ट की जांच करता है. जिन पैराग्राफ्स पर सरकार से सवाल पूछने की जरूरत होती है, उसे रेखांकित किया जाता है और संबंधित व्यक्ति को जवाब देने के लिए बुलाया जाता है. इसके बाद कैग की रिपोर्ट पर पीएसी के रिपोर्ट को संसद के सामने पेश किया जाता है. यह एक बहुत ही गहन और व्यापक प्रक्रिया है.’

डीपी माथुर ने इस मामले को विस्तार से बताते हुए कहा, ‘सीएजी रिपोर्ट का मसौदा गोपनीय होता है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जाता है. इसे सरकार के साथ साझा किया जाता है और सरकार के जवाब को अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाता है. कई सारे रिपोर्ट्स को संसद में भेजे जाने से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण देशों या हथियार प्रणालियों के प्रकार या हथियार या मात्रा को छुपा दिया जाता है.’

हाल ही में रिटायर हुए एक कैग अधिकारी ने नाम न लिखने के शर्त पर ये स्पष्ट किया कि जिस चीज को छुपाना होता है उसे रिपोर्ट सार्वजनिक करने से पहले किया जाता है.

उन्होंने आगे कहा, ‘अगर पीएसी कैग से पूछती है कि जो चीजें छुपाई गईं हैं उसके बारे में जानकारी दी जाए तो कैग कमेटी की संतुष्टि के लिए गोपनीय तरीके से वो जानकारी साझा करता है.’ सरकार और कैग के बीच बातचीत के जरिए ये तय किया जाता है कि कौन सी जानकारी संवेदनशील है और उसे छिपाने की जरूरत है.



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