डेस्टीनेशन उत्तराखण्ड, न्यू इण्डिया का परिचायक: नरेंद्र मोदी

Posted on 07 Oct 2018 -by Watchdog

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेस्टीनेशन उत्तराखण्ड इन्वेस्टर्स समिट का उदघाटन करते हुए कहा कि बाबा केदार की भूमि से निवेशक दैवीय अनुभूति करेंगे। नई चेतना प्राप्त करेंगे। डेस्टीनेशन उत्तराखण्ड, न्यू इण्डिया का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखण्ड को नई दिशा देने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। डेस्टीनेशन उत्तराखण्ड का मंच, इन्हीं प्रयासों की परिणति है। उत्तराखण्ड में सेज (SEZ) का मतलब है स्पिरीचुअल इको जोन इसकी ताकत किसी अन्य सेज से लाखों गुना ज्यादा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य में कनेक्टीवीटी बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। चारधाम आॅल वेदर रोड़ व कर्णप्रयाग-ऋषिकेष रेल परियोजना से यहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिला है। अनेक तरह के नीतिगत सुधार किए गए हैं। आर्गेनिक खेती की भी यहां भरपूर सम्भावना है। एग्रीकल्चर में वेल्यू एडीशन से किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी। नवीकरणीय उर्जा में भारत वल्र्ड लीडर बन सकता है। उत्तराखण्ड में उर्जा सम्भावना इतनी है कि देश की उर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेक इन इण्डिया में उत्पादन पूरे विश्व के लिए होना चाहिए। भारत की प्रगति राज्यों की सम्भावनाओं को वास्तविकताओं में बदल कर ही किया जा सकता है। यह अच्छी बात हुई है कि राज्यों में स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा प्रारम्भ हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 18 साल की उम्र बहुत महत्वपूर्ण होती है। उत्तराखण्ड की संस्कृति बहुत पुरातन है परंतु राज्य निर्माण को 18 साल हुए हैं। राज्य सरकार में कुछ नया कर गुजरने का जज्बा है। राज्य में आर्थिक विकास के लिए केंद्र सरकार हरसम्भव सहयोग प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने इन्वेस्टर्स समिट में आए उद्यमियों से उत्तराखण्ड में निवेश का आह्वान करते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्य को आगे बढ़ाने में आवश्यक सहयोग देगी। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि नए भारत के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत वैश्विक समृद्धि का प्रमुख इंजन बनने वाला है। फिस्कल डेफिसिट कम हो रहा है और महंगाई दर भी नियंत्रण में है। मिडिल क्लास का प्रसार हुआ है। आर्थिक सुधार में जो कदम उठाए गए उससे ईज आॅफ डूईंग बिजनेस में भारत ने काफी सुधार हुआ है। पुराने व अव्यवहारिक हो चुके 1400 से ज्यादा पुराने कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। देश की स्वतंत्रता के बाद जीएसटी के तौर पर सबसे बड़ा टेक्स रिफार्म किया गया है। इन्फ्रास्टक्चर में काफी तेजी से काम किया गया है। प्रति दिन 27 कि.मी. एनएच का निर्माण किया गया है। रेल लाईन में भी दोगुनी गति से काम किया गया है। देश में 100 नए एयर पोर्ट व हैलीपेड बनाने पर काम कर रहे हैं। उड़ान योजना देष के शहरों को जोड़ने में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। आयुष्मान भारत से हेल्थ सेक्टर में निवेश का बड़ी सम्भावना बनी है। डेस्टीनेशन उत्तराखण्ड न्यू इण्डिया का प्रतिनिधित्व करता है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखण्ड को नई दिशा देने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। डेस्टीनेशन उत्तराखण्ड का मंच इन्हीं प्रयासों की परिणति है। उम्मीद है कि ये प्रयास जमीन पर भी खरे उतरेंगे। 

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का स्वागत करते हुए कहा कि राज्यपाल श्रीमती बेबीरानी मौर्य जी, तमाम केंद्रीय मंत्रीगण,  चेक गणराज्य, जापान के राजदूत, योगगुरु स्वामी रामदेव जी, और देश विदेश से पधारे उद्योग जगत के तमाम उद्यमी मित्रों। देवधरा में आप सभी का हार्दिक अभिनंदन। मैं उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता की ओर से, डेस्टिनेशन उत्तराखंड पर भरोसा जताने के लिए आपका आभार प्रकट करता हूँ। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की इस मंच पर गरिमामयी उपस्थिति से  हमारा उत्साहवर्धन हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री को देवभूमि उत्तराखंड की जनता की ओर से चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई देते हुए कहा कि ये देश की सवा सौ करोड़ जनता के लिए किसी गौरव से कम नहीं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि डेस्टिनेशन उत्तराखंड की प्रेरणा हमें प्रधानमंत्री जी की नायाब सोच, कोऑपरेटिव फेडरलिज्म से मिली। राज्यों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हो, इसी सोच का नाम है डेस्टिनेशन उत्तराखंड।साल 2000 में जब उत्तराखंड का गठन हुआ था, तो उद्योगों के लिहाज से यह पिछड़ा क्षेत्र था, राज्य में पूंजी निवेश व रोजगार के समुचित अवसर उपलब्ध नहीं थे। लेकिन स्व. अटल जी की सरकार ने उत्तराखंड को विशेष औद्योगिक पैकेज देकर अपने पैरों पर खड़ा करने में मदद की।

उद्यमियों को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति ने इस देवधरा को भरपूर नैसर्गिक सौंदर्य से नवाजा है। हमने इस राज्य में मौजूद संभावनाओं को आप सबके सामने रखा है। ‘‘मैं आपको ये विश्वास दिलाता हूँ कि, हमारा आपका रिश्ता केवल सरकार और निवेशक भर का न रहकर, राज्य की खुशहाली में साझीदार बनने का भी है।’’

यह सम्मेलन राज्य के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार, संतुलित क्षेत्रीय तथा समावेशी विकास हेतु उत्तराखण्ड के दृष्टिकोण को समझने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

हमारी सरकार ने निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई नीतिगत उपाय और प्रोत्साहन प्रदान किए हैं। इसके लिए पिछले एक महीने में 10 नई नीतियों को मंजूरी दी गई है। मुझे खुशी है कि इन नीतियों को बनाते वक्त उद्यमियों के ज्यादातर सुझावों को शामिल किया गया है। समिट से पहले ही तकरीबन 70 हजार करोड़ के एमओयू साइन किए जा चुके हैं।  

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बेहतर व्यापारिक वातावरण के लिए जो खूबियाँ चाहिए वह सब इस राज्य में मौजूद हैं। हमारी पहचान शांत सुरक्षित राज्य के तौर पर है। हमारे राज्य में स्किल्ड मैनपावर है, बिजली की दरें यहाँ काफी सस्ती हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हम सभी पहाड़ी राज्यों में सबसे आगे हैं। उत्तराखंड में निवेशकों की राह आसान करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू है। जब राज्य बना था तब प्रति व्यक्ति आय 25 हजार रूपये थी, आज यह बढ़कर 1 लाख 73 हजार 820 रुपये हो गई है। यह ये बात साबित करती है कि विकास के मापदंडों पर उत्तराखंड का प्रदर्शन शानदार रहा है।

उत्तराखंड के बिजनेस हब हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे जिले देश के प्रमुख व्यापारिक बाजारों से मजबूत रेल नेटवर्क से जुड़े हैं। देहरादून एयरपोर्ट देश के व्यस्ततम एयरपोर्ट में शामिल है। उड़ान योजना के बाद एयर कनेक्टिविटी को राज्य के कोने कोने तक मुहैया कराया जा रहा है। 

उत्तराखंड में सड़कों का मजबूत नेटवर्क है जिसमें 2,954 किमी. नेशल हाइवे, 4,637 किमी. स्टेट हाइवे और 34,515 किमी. ग्रामीण मोटर मार्ग शामिल हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीण सड़कों और स्टेट राजमार्गों द्वारा कनेक्टिविटी बढ़ाने के प्रयास किए गए हैं। ऑल वेदर रोड और 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन चार धामों तक सड़क और रेल कनेक्टिविटी को मजबूती देगी। यानी रोड, रेल और एयर कनेक्टिविटी के लिहाज से  उत्तराखंड निवेश के लिए एक आदर्श डेस्टिनेशन है।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की आर्थिकी को पर्यटन आधारित बनाना चाहते हैं। इसलिए हमने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया है। हम 13 जिलों में 13 नए टूरिज्म डेस्टिनेशन का निर्माण कर रहे हैं। इस क्षेत्र में निवेश के भरपूर अवसर मौजूद हैं।

उत्तराखंड, योग आध्यात्म और वेलनेस का सेंटर है। यहाँ हिमालय की कंदराओं में दुर्लभ जड़ी बूटियाँ और औषधीय गुणों के आयुर्वेदिक पौधे मौजूद हैं। हम उत्तराखंड को फिटनेस, वेलनेस और हैप्पीनेस का केंद्र बनाना चाहते हैं।

नवीकरणीय उर्जा के क्षेत्र में उत्तराखंड के पास 4,000 मेगावाट के सोलर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है। चीड़ की पत्तियाँ जिसे स्थानीय भाषा में पिरूल कहा जाता है, इसे भी हमने बायोफ्यूल तैयार करने के लिए पिरूल पॉलिसी लागू की है। 

उत्तराखंड एक ऑर्गैनिक स्टेट के तौर पर विकसित हो, इसकी प्रेरणा प्रधानमंत्री जी ने दी है। हमने प्रदेश में 10 हजार ऑर्गैनिक क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। अब तक हम साढ़े चार हजार क्लस्टर चिन्हित कर काम शुरू कर चुके हैं। ऑर्गैनिक प्रोडक्ट के बड़े बाजार को देखते हुए निवेशकों के लिए यह भी एक आकर्षक क्षेत्र है।

मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार सिंह ने हिमालय और प्रकृति की गोद मे स्थित गंगा, यमुना, संतों, सूफियों और गुरुओं की धरती को तप भूमि बताते हुए कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य,गुरु गोविंद सिंह जी,सूफी संत हजरत साबिर कलियारी, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी की तपोभूमि है। यहां के लोगों की उद्यमिता की वजह से ही युवा स्टार्टअप, महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित प्रसाद, सड़कों की मरम्मत,होम स्टे जैसी गतिविधियां चल रहीं हैं।विगत 18 वर्षों राज्य की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी दस गुना बढ़कर 1.60 लाख रुपये हो गई है।रोड नेटवर्क 789 किलोमीटर प्रति 1000 वर्ग किलोमीटर हो गई है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ साथ यहां के लोगों ने प्रकृति के संरक्षण में भी योगदान दिया है।

श्री सिंह ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि राज्य की अनूठी विशेषताओं का आकलन कर 12 क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है। खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन एवं आतिथ्य,आयुष एवं वैलनेस,ऑटोमोबाइल और ऑटो उपकरण,फार्मास्युटिकल्स,नेचुरल फाइबर्स, हॉर्टिकल्चर एवं फ्लोरीकल्चर,जड़ी बूटी एवं सगंध पादप,आईटी, बायो टेक्नोलॉजी,नवीनीकरण ऊर्जा सेक्टर प्रमुख हैं।

उन्होंने बताया कि निवेश के लायक 50  परियोजनाएं तैयार की गई हैं। विगत 18 वर्षों में उत्तराखंड व्यापार गंतव्य के रूप में उभरा है। मुख्य सचिव ने बताया कि उत्तराखंड में निवेशकों के आकर्षित होने के कई कारण हैं।प्रदूषणमुक्त पर्यावरण,जल की अधिकता,शांतिपूर्ण माहौल,राज्य सरकार का उद्योग के प्रति सकारात्मक रुख,रेल,रोड और एयर कनेक्टिविटी,आधुनिक एवं एकीकृत औद्योगिक आस्थान, सस्ती दर पर बिजली,उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान, हिल स्टेशन प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का उत्तराखंड के प्रति विशेष लगाव होने की वजह से आल वेदर चारधाम सड़क परियोजना, भारतमाला परियोजना, कर्ण प्रयाग रेल परियोजना और बड़ी संख्या में अंतरराज्यीय सड़कों का चैड़ीकरण प्रमुख है।

अमूल के एमडी आर.एस सोढ़ी ने कहा कि डेयरी व्यवसाय की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड में इसकी काफी सम्भावनाएं हैं। महिन्द्रा ग्रुप के एमडी पवन कुमार गोयनका ने कहा कि उत्तराखण्ड में गुड गर्वनेंस उद्योग व निवेष में सहायक है। आईटीसी के संजीव पुरी ने कहा कि राज्य में फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में काफी काम किया जा सकता है। अड़ानी ग्रुप के प्रणव अड़ानी ने कहा कि उनके गु्रप द्वारा मेट्रो, स्मार्ट सिटी व सोलर के क्षेत्र में राज्य में निवेष की योजनाएं बनाई हैं। उत्तराखण्ड की औद्योगिक नीतियां व सिंगल विंडो सिस्टम निवेष के अनुकूल हैं। पतंजलि के आचार्य बालकृष्ण ने उत्तराखण्ड में योग, आयुष व वैलनेस की व्यापार सम्भावनाओं पर प्रकाष डाला। 

कार्यक्रम को सिंगापुर के सूचना प्रसारण मंत्री एस.ईष्वरन, भारत में जापान के राजदूत केंजी हिरमात्सु, चेक गणराज्य के राजदूत मिलन होवोरका ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल श्रीमती बेबीरानी मौर्य सहित उत्तराखण्ड सरकार के मंत्रीगण, विधायक, सम्मेलन में प्रतिभाग करने आए उद्यमी व निवेषक उपस्थित थे। 

इससे पूर्व रायपुर स्थित इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित इन्वेस्टर्स समिट का उद्घाटन करने आए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने थीम पैवेलियन व प्रदर्शनी स्थल का अवलोकन भी किया।



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