किसानों की क़र्ज़ माफ़ी पर हंगामा, बैंकों को एक लाख करोड़ देने पर चुप्पी

Posted on 24 Dec 2018 -by Watchdog

रवीश कुमार

क्या आपको पता है कि बैंकों को फिर से 410 अरब रुपये दिए जा रहे हैं? वित्त मंत्री जेटली ने संसद से इसके लिए अनुमति मांगी है. यही नहीं सरकार ने बैंकों को देने के लिए बजट में 650 अरब रुपये का प्रावधान रखा था. बैंकों की भाषा में इसे कैपिटल इन्फ्लो कहा जाता है.

सरकार बैंकों को एक साल में 1 लाख करोड़ रुपये क्यों देना चाहती है? आप किसी भी विश्लेषण को पढ़िए, यही जवाब मिलेगा कि बैंकों ने पहले जो लोन दिए थे वो चुकता नहीं किए गए. फिर से लोन देने के लिए पैसे नहीं हैं. इसलिए सरकार अपनी तरफ से बैंकों को पैसे दे रही है ताकि बाज़ार में लोन के लिए पैसे उपलब्ध हो सके.

किसने लोन लेकर नहीं चुकाए हैं और किसे नया लोन देना है, इन दो सवालों के जवाब से सब कुछ साफ हो जाएगा. क्या यह कैपिटल इन्फ्लो के नाम पर कर्ज़ माफ़ी नहीं है?भारतीय रिज़र्व बैंक ने 11 सरकारी बैंकों को प्रांप्ट करेक्टिव एक्शन की सूची में डाल दिया था. इन सभी से कहा गया था कि वे एनपीए खातों की पहचान करें, लोन को वसूलें, जो लोन न दे उस कंपनी को बेच दें और नया लोन देना बंद कर दें.

बैंकों का एनपीए जब खास सीमा से ज़्यादा हो गया तब यह रोक लगाई गई क्योंकि बैंक डूब सकते थे. अब हंगामा हुआ कि जब बैंक लोन नहीं देंगे तो अर्थव्यवस्था की रफ्तार रुक जाएगी. पर ये उद्योगपति सरकारी बैंकों से ही क्यों लोन मांग रहे हैं, प्राइवेट से क्यों नहीं लेते?

इनके लिए सरकार सरकारी बैंकों में एक लाख करोड़ रुपये क्यों डाल रही है? किसान का लोन माफ करने पर कहा जाता है कि फिर कोई लोन नहीं चुकाएगा. यही बात इन उद्योगपतियों से क्यों नहीं कही जाती है?

सितंबर 2018 में बैंकों का नॉन परफार्मिंग असेट 8 लाख 69 हज़ार करोड़ रुपये का हो गया है. जून 2018 की तुलना में कुछ घटा है क्योंकि तब एनपीए 8 लाख 74 हज़ार करोड़ रुपये था. लेकिन सितंबर 2017 में बैंकों का एनपीए 7 लाख 34 हज़ार करोड़ रुपये था.

बैंकों का ज़्यादातर एनपीए इन्हीं उद्योगपतियों के लोन न चुकाने के कारण होता है. क्या वाकई रिज़र्व बैंक की सख़्ती के कारण बैंकों ने लोन देना बंद कर दिया है?

बिजनेस स्टैंडर्ड में तमल बंधोपाध्याय का संपादकीय लेख छपा है. उन्होंने लिखा है कि बैंक सेक्टर के क़र्ज़ देने की रफ्तार बढ़ी है. 15 प्रतिशत हो गया है. जीडीपी की रफ़्तार से डबल. फिर सरकार को क्यों लगता है कि यह काफी नहीं है. बैंकों को और अधिक क़र्ज़ देना चाहिए.

1 लाख करोड़ रुपये जब सरकारी बैंकों को मिलेगा तब वे रिज़र्व बैंक की निगरानी से मुक्त हो जाएंगे. लोन देने के लिए उनके हाथ फिर से खुल जाएंगे.सरकार बैंकों को 1986 से पैसे देते रही है, लेकिन उसके बाद भी बैंक कभी पूंजी संकट से बाहर नहीं आ सके. 1986 से 2017 के बीच एक लाख करोड़ रुपये बैंकों में दिए गए हैं. 11 साल में एक लाख करोड़ से अधिक की राशि दी जाती है. अब इतनी ही राशि एक साल के भीतर बैंकों को दी जाएगी.

बिजनेस स्टैंडर्ड के एक और लेख में देबाशीष बसु ने लिखा है कि यह सीधा-सीधा दान था. इसका बैंकों के प्रदर्शन में सुधार से कोई लेना-देना नहीं था. दस लाख करोड़ का एनपीए हो गया, इसके लिए न तो कोई नेता दोषी ठहराया गया और न बैंक के शीर्ष अधिकारी.

नेता हमेशा चाहते हैं कि बैंकों के पास पैसे रहें ताकि दबाव डालकर अपने चहेतों को लोन दिलवाया जा सके, जो कभी वापस ही न हो.

देबाशीष बासु ने मोदी सरकार के शुरूआती फ़ैसलों में से एक की ओर ध्यान दिलाया है. चार राज्यों में 23 ज़िला सहकारिता बैंकों को पुनर्जीवित करना था. इन सभी के पास लाइसेंस नहीं थे. 23 में से 16 बैंक यूपी में थे.

नियमों के अनुसार इन सबको बंद कर दिया जाना था मगर सरकार ने इन्हें चलाने की अनुमति दी. बसु ने लिखा है कि सरकार इस विवादास्पद फ़ैसले से क्या संकेत देना चाहती थी?

देबाशीष बसु ने इसके बारे में विस्तार से नहीं लिखा है मगर इस सूचना को और विस्तार देने की ज़रूरत है. बिना लाइसेंस के सहकारिता बैंक खुलवा देने का खेल क्या है, इसे मैं भी समझने का प्रयास करूंगा.तमल बंधोपाध्याय ने लिखा है कि क्या बैंकों को क़र्ज़ देना आता है? शायद नहीं. अगर पता होता तो वे इस संकट में नहीं होते. अर्थव्यवस्था की हालत पर दोष मढ़ना सही नहीं है क्योंकि इसी माहौल में प्राइवेट बैंक भी काम करते हैं. उनके एनपीए की हालत इतनी बुरी क्यों नहीं है?उन्होंने लिखा है कि सरकार बैंकों को जो लाख-लाख करोड़ देती है वह किसानों की क़र्ज़ माफ़ी से कोई अलग नहीं है. अगर सरकार इसी तरह से बैंकों में पूंजी ठेलती रही तो क्या उद्योगपतियों पर कर्ज़ चुकाने का दबाव हल्का नहीं होगा, वैसे ही जैसे किसान कर्ज़ नहीं देंगे.

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक और रिपोर्ट पर ग़ौर करने की ज़रूरत है. अभिषेक वाघमरे और संजीब मुखर्जी की रिपोर्ट है कि यूपी चुनाव में किसानों की कर्ज़ माफ़ी के वादे के बाद से अब तक सात राज्यों में करीब पौने दो लाख करोड़ रुपये से अधिक कर्ज़ माफ़ी का ऐलान हो चुका है. लेकिन महाराष्ट्र, यूपी, पंजाब और कर्नाटक में 40 प्रतिशत किसानों का ही लोन माफ हुआ है. दो राज्य भाजपा के हैं और दो कांग्रेस के.

उत्तर प्रदेश में लघु और सीमांत किसानों के एक लाख तक के कर्ज़ माफ होने थे. अप्रैल 2017 में फैसले का ऐलान हो गया. दावा किया गया था कि 86 लाख किसानों को लाभ होगा. इस पर 364 अरब रुपये ख़र्च होंगे.

लेकिन 21 महीने बीच जाने के बाद मात्र 44 लाख किसानों की ही कर्ज़ माफी हुई है. यही नहीं कर्ज़ माफ़ी के बाद से इन चार राज्यों में खेती पर दिया जाने वाला कर्ज़ भी कम हो जाता है. इस रिपोर्ट को पढ़िए तो काफी कुछ समझ आएगा.

हिन्दी के पाठकों के लिए ज़रूरी है कि वे मुद्दों को समझने के लिए अलग-अलग और कई प्रकार के सोर्स का सहारा लें. तभी समझ आएगा कि दस लाख करोड़ का लोन नहीं चुकाने वाले चंद मुट्ठी भर लोग मौज कर रहे हैं. उन्हें और लोन मिले इसके लिए सरकार 1 लाख करोड़ रुपये सरकारी बैंकों को दे रही है.

किसानों के लोन माफ़ होते हैं, कभी पूरे नहीं होते हैं, होते भी हैं तो उन्हें कर्ज़ मिलने से रोका जाने लगता है. उद्योगपतियों को लोन देने में दिक्कत नहीं है, दिक्कत है लोन नहीं चुकाने और उसके बाद भी नया लोन देने के लिए सरकारों के बिछ जाने से.

फिर क्यों किसानों की बात आती है तो मिडिल क्लास लतीफ़े बनाने लगता है. अच्छा है अलग-अलग सोर्स से दस-पांच लेख पढ़ ले, बहस की गुणवत्ता लतीफ़ों से बेहतर हो जाएगी.

(यह लेख मूल रूप से रवीश कुमार के ब्लॉग कस्बा पर प्रकाशित हुआ है.)



Generic placeholder image


नहीं रहे वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी
19 Jan 2019 - Watchdog

मास्टर ऑफ रोस्टर अब मास्टर ऑफ कॉलेजियम भी बन गए हैं
19 Jan 2019 - Watchdog

जेएनयू मामला: कोर्ट ने लगाई दिल्ली पुलिस को फटकार
19 Jan 2019 - Watchdog

हम भ्रष्टाचार नही करेंगे, तो लोकपाल की क्या ज़रूरत है.-मुख्यमंत्री
18 Jan 2019 - Watchdog

द कारवां की स्टोरी ने अजित डोभाल के राष्ट्रवाद को नंगा कर दिया है!
18 Jan 2019 - Watchdog

नरेंद्र मोदी ने 36 रफाल विमानों का सौदा 41 प्रतिशत अधिक कीमत पर किया
18 Jan 2019 - Watchdog

मोदी सरकार की नौ फीसदी सस्ते दर पर रफाल खरीदने की बात असल में झांसा है
18 Jan 2019 - Watchdog

लोकपाल पर सर्च कमेटी फरवरी अंत तक नाम की सिफारिश करे: सुप्रीम कोर्ट
17 Jan 2019 - Watchdog

जुलाई माह तक प्रदेश के गांवों को इंटरनेट से कवर कर दिया जाएगा: सीएम
17 Jan 2019 - Watchdog

तेल्तुंबडे की गिरफ्तारी इतिहास का सबसे शर्मनाक और चकित कर देने वाला क्षण होगा: अरुंधति
17 Jan 2019 - Watchdog

राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल के बेटों की ‘फर्जी’ कंपनियों का जाल
16 Jan 2019 - Watchdog

एनएसए डोभाल के बेटे का मिला विदेशों में काले धन का कारख़ाना
16 Jan 2019 - Watchdog

जज लोया मामले में बांबे हाईकोर्ट ने मांगा याचिकाकर्ता से पूरा विवरण
15 Jan 2019 - Watchdog

उत्तराखंड में अनाथ बच्चों को सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत आरक्षण
12 Jan 2019 - Watchdog

बीजेपी नेता के ठिकानों पर दून समेत अन्य शहरों में इनकम टैक्स के छापे
12 Jan 2019 - Watchdog

सीवीसी जांच की निगरानी करने वाले पूर्व जज ने कहा, आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के सबूत नहीं
12 Jan 2019 - Watchdog

सपा-बसपा के बीच गठबंधन, उत्तर प्रदेश में 38-38 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव
12 Jan 2019 - Watchdog

पूर्व सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने इस्तीफ़ा दिया
11 Jan 2019 - Watchdog

सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा आरक्षण बिल का मामला, NGO ने कहा- आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दे सकते
10 Jan 2019 - Watchdog

सामान्य वर्ग को आरक्षण एक अव्यवस्थित सोच, गंभीर राजनीतिक-आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं: अमर्त्य सेन
10 Jan 2019 - Watchdog

सामान्य वर्ग को आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ : जस्टिस एएम अहमदी
09 Jan 2019 - Watchdog

श्रमिक संगठनों के हड़ताल का देशव्यापी असर
09 Jan 2019 - Watchdog

दुविधा में दोनों गए, माया मिली न राम !
08 Jan 2019 - Watchdog

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र को तगड़ा झटका, आलोक वर्मा सीबीआई चीफ के पद पर फिर से बहाल
08 Jan 2019 - Watchdog

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से कहा, हलफनामा दायर कर बताएं कि लोकपाल नियुक्ति के लिए क्या किया
07 Jan 2019 - Watchdog

सवर्णों को सरकारी नौकरी और शिक्षण संस्थानों में मिलेगा 10 फीसदी आरक्षण
07 Jan 2019 - Watchdog

भारत में पैर पसारता पॉर्न कारोबार
05 Jan 2019 - Watchdog

सावित्री बाई फुले: जिन्होंने औरतों को ही नहीं, मर्दों को भी उनकी जड़ता और मूर्खता से आज़ाद किया
04 Jan 2019 - Watchdog

सप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले की सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टाली
04 Jan 2019 - Watchdog

केरल की दो महिलाओं ने सबरीमला मंदिर में प्रवेश किया
02 Jan 2019 - Watchdog


किसानों की क़र्ज़ माफ़ी पर हंगामा, बैंकों को एक लाख करोड़ देने पर चुप्पी