मोदी की बड़ी रणनीतिक भूल है “मैं भी चौकीदार हूं!”

Posted on 17 Mar 2019 -by Watchdog

प्रेम कुमार

मैं भी चौकीदार हूं’ अभियान शुरू कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आक्रामक तेवर दिखाया है या कि यह सुरक्षात्मक राजनीति है- इसे लेकर एक राय नहीं हो सकती। बीजेपी के समर्थक और विरोधी दोनों उत्साहित दिख रहे हैं। बीजेपी नेता कह रहे हैं कि इस अभियान से वे राहुल गांधी के मोदी विरोध की हवा निकाल देंगे, तो कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि राहुल गांधी जो मुद्दा उठा रखा है- ‘चौकीदार चोर है’, वह मुद्दा अब चुनाव में और उभर कर सामने आएगा। 

अगर क्रिकेट की बात करें तो ‘चौकीदार’ के रूप में जो गेंद नरेंद्र मोदी की ओर राहुल गांधी की ओर से फेंकी गयी, उसे नरेंद्र मोदी ने एक बल्लेबाज के तौर पर हवा में जोरदार तरीके से उछाल दिया है। सबकी नज़रें ‘चौकीदार’ नामक उस गेंद पर है जिसे कैच करने के लिए नज़रें टिकाए लगाए कांग्रेसी खिलाड़ी पोजीशन लिए हुए हैं और दर्शक दिल थामे बैठे हैं- समर्थक भी और विरोधी भी।

मोदी समर्थकों को यकीन है कि मोदी की तकनीक इतनी अच्छी है कि गेंद हवा में छह रनों के लिए सीमा पार जाएगी ही। वहीं, मोदी विरोधी मुस्कुरा रहे हैं कि राहुल की गुगली में आ फंसे हैं मोदी। अपना विकेट वे गंवा चुके हैं। किनकी बातों में कितना दम है। कौन विश्वसनीय है इसके लिए करना होगा थोड़ा इंतज़ार, क्योंकि वक्त हो चुका है कॉमर्शियल ब्रेक का, जिसे चुनाव के मौसम में हम मान लेते हैं चुनाव कैम्पेन का वक्त।

पीएम मोदी की पहली भूल : चुनावी मुद्दा बनेगा ‘चौकीदार’


अब इसमें संदेह नहीं कि ‘चौकीदार’ चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है। अगर ऐसा है तो निश्चित रूप से नरेंद्र मोदी ने कैच उछाल दिया है ऐसा निश्चित रूप से कहा जा सकता है। माना कि ‘मैं भी चौकीदार हूं’ का नारा जब बड़ा अभियान बन जाएगा तो सबको चोर बताने का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। मगर, कांग्रेस तो बस एक चौकीदार यानी देश के चौकीदार नरेंद्र मोदी पर फोकस करने वाली है। नीरव मोदी, राफेल जैसे मुद्दों पर आंकड़े खोज-खोज कर कांग्रेस निकाल सकती है। 


पीएम मोदी की दूसरी भूल : ‘भ्रष्टाचार’ पर भी होगी बात

भ्रष्टाचार का जो मुद्दा कांग्रेस उठाना चाह रही थी और एयर स्ट्राइक के बाद से यह मुद्दा परिदृश्य से ओझल हो चला था, अब ‘मैं भी चौकीदार हूं’ अभियान के बाद खुद ब खुद सतह पर आ जाएगा। मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के मामलों को सामने लाने की जिम्मेदारी विरोधी दलों की होगी। उसी आधार पर चुनाव में बीजेपी को घेरा जा सकेगा। 


पीएम मोदी की तीसरी भूल : ‘राफेल’ अब नहीं होगा फेल

राफेल को लेकर लगातार नये खुलासे हुए हैं। महंगी खरीद, अनिल अम्बानी को फायदा पहुंचाना, सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में गलत तथ्य देना, द हिन्दू में छपी रिपोर्ट, एचएएल की अनदेखी, क्षमता से कम राफेल की ख़रीद जैसी बातों को दोहराने का मौका भी विरोधी दलों के पास होगा। पुलवामा हमले और एयर स्ट्राइक के बाद जो राफेल का मुद्दा परवान नहीं चढ़ पा रहा था, अब पीएम मोदी के ‘मैं चौकीदार हूं’ अभियान के बाद नये सिरे से परवान चढ़ेगा यह निश्चित लगता है।


पीएम मोदी की चौथी भूल : ‘पप्पू’ से पकड़ा बीजेपी ने ‘मुद्दा’

बीजेपी ने राहुल गांधी के साथ हमेशा ही ‘पप्पू’ के तौर पर व्यवहार किया है। अब बीजेपी को उसी पप्पू की सुलभ कराये गये शब्द ‘चौकीदार’ को अपने मुख्य अभियान का हिस्सा बनाना पड़ा है। यह बीजेपी की कमजोरी अधिक नज़र आती है। ऐसा लगता है कि खिलाड़ी के तौर पर नरेंद्र मोदी के पास किसी और किस्म का शॉट नहीं रह गया था। राहुल ने गुगली फेंकी और नरेंद्र मोदी ने चिरपरिचित अंदाज में बल्ला घुमा दिया। इस तरह गेंद हवा में चली गयी जिसके नीचे आ रहे हैं विरोधी टीम के खिलाड़ी। न सिर्फ बीजेपी ने ‘चौकीदार’ नामक गेंद यानी मुद्दे का सम्मान किया है बल्कि इस मुद्दे को उठाने वाले राहुल गांधी को भी अच्छी-खासी तवज्जो दी है।


पीएम मोदी की पांचवीं भूल : भरोसा देती नहीं मांगती दिख रही है बीजेपी

2014 में बीजेपी ने देश की जनता को भरोसा दिलाया था कि अच्छे दिन आने वाले हैं। जबकि, 2019 में बीजेपी जनता से भरोसा मांग रही है कि वह कहे कि वह भी चौकीदार है। चुनाव अभियान का मकसद ही उलट गया है। यह अभियान आम वोटरों के बजाए बीजेपी कार्यकर्ताओं का बन कर रह गया है। ऐसा लगता है मानो नरेंद्र मोदी विरोधी दलों को यह बताना चाहते हों कि जनता उनके साथ है। मगर, चुनाव परिणाम खुद यह निर्णय कर देगा कि जनता किसके साथ है। ऐसे में अपने कार्यकाल के काम और सुनहरे सपनों के बजाए केवल पार्टी के नारे से लोगों को जोड़ना ये बताता है कि वास्तव में नरेंद्र मोदी खुद को भरोसा दिला रहे हैं कि लोग उनके साथ हैं। क्या उन्हें अब इसका भरोसा नहीं रहा? 


पीएम मोदी की छठी भूल : ‘अच्छे दिन’ के मुकाबले हल्का नारा 

 ‘अगर अच्छे दिन आने वाले हैं’ के नारे से ‘मैं भी चौकीदार हूं’ की तुलना करें तो यह बिल्कुल दो अलग भाव बताते हैं। एक सपना है तो दूसरा ज़िम्मेदारी लेने की अपील। बुरे शासनकाल से देश को अच्छे दिन की ओर ले जाना यह हर किसी की चाहत रही थी। मगर, ‘चौकीदार’ तो वही होगा जिसके पास ज़िम्मेदारी होगी। बगैर जिम्मेदारी के कोई ‘चौकीदार’ कैसे हो सकता है? अगर नहीं हो सकता, तो इस नारे से आम लोग जुड़ेंगे कैसे?


पीएम मोदी की सातवीं भूल : वोटर क्या सोचें जब एमजे अकबर बोलें- मैं भी चौकीदार हूं

अगर नरेंद्र मोदी कहते हैं ‘मैं चौकीदार हूं’ तो उन पर यकीन करने वाले उनकी ही तर्ज पर ‘मैं भी चौकीदार हूं’ कहने में गर्व महसूस करेंगे। मगर मोदी समर्थकों में से ही, मान लीजिए कि एमजे अकबर कहते हैं कि ‘मैं भी चौकीदार हूं’ तो जनता क्या सबक लेगी? क्या मी टू का दागी व्यक्ति भी चौकीदार हो सकता है? अगर हां, तो क्या यही बात मतदाता भी मानते हैं- यह बड़ा सवाल है। 


पीएम मोदी की आठवीं भूल : आक्रामक नहीं, सुरक्षात्मक अभियान 

नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किया गया ‘मैं चौकीदार हूं’ का अभियान सुरक्षात्मक अभियान है। यह विरोधी कांग्रेस की ओर से उठाए गये सवाल को आगे बढ़ाता दिखता है। चौकीदार पर जो उंगली राहुल गांधी ने दिखलायी है उन उंगलियों को उठे रहने के लिए यह अभियान और सख्त बनाता है। 

इस पृष्ठभूमि में देखा जाए तो यह साफ नज़र आता है कि नरेंद्र मोदी से बड़ी रणनीतिक भूल हो चुकी है। देशभक्ति के मुद्दे पर मिल रहे समर्थन के बीच उन्होंने ऐसी रणनीतिक भूल कर दी है कि अब चुनाव का मुद्दा भी बदलते वक्त नहीं लगेगा। अगर मुद्दा बदल गया तो नुकसान बीजेपी और एनडीए को होना तय है। हालांकि यह इस बात पर भी निर्भर करने वाला है कि इस मुद्दे को सही तरीके से विरोधी दल कैच कर पाते हैं या नहीं। अगर कैच लेते समय उनके हाथों में ही चोट लग गयी, तो कैच निश्चित रूप से नहीं होगा। तब उस स्थिति में कैच लूज करने से मैच लूज हो जाता है, यह बात नये सिरे से साबित हो सकती है। फिलहाल यह जरूर कहा जा सकता है कि नरेंद्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार हूं’ अभियान छेड़कर हवा में कैच उछाल दिया है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं ।)  



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