भारत में अगले दो दशक बहुत अशांत और खूनी होंगे, जस्टिस काटजू

Posted on 02 Oct 2019 -by Watchdog

 सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि भारत में हमारे सभी राज्य संस्थान ध्वस्त हो गए हैं और खोखले और खाली गोले बन गए हैं. हमारे देश में अगले दो दशक बहुत अशांत और खूनी होंगे।

एक अंग्रेज़ी वेब साइट पर लिखे अपने एक लेखThe Storm Ahead : In India all our state institutions have collapsed and become hollow and empty shells.” में जस्टिस काटजू ने कहा कि मैं अपने जीवन के ढलान पर हूँ (मैं अभी 73 वर्ष पार कर चुका हूँ) और मेरे शेष वर्ष भारतीय लोगों (अमेरिका के एनआरआई सहित, जहां मैं वर्तमान में जी रहा हूं, को शिक्षित करने पर व्यतीत किया जाएगा, जो जो हालांकि अपनी तकनीकी नौकरियों में बहुत अच्छे हैं, लेकिन अन्य मामलों में कुछ अधिक मूर्ख और भोले हैं।

उन्होंने लिखा, “जो कुछ मैं सिखाता हूं, उसका निचोड़ इस प्रकार है: इस दुनिया में वास्तव में दो दुनिया हैं;पहली, विकसित, अत्यधिक औद्योगिक देशों की दुनिया, यानी उत्तरी अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और चीन।दूसरा, भारत (जो शायद अविकसित देशों में सबसे अधिक विकसित है) सहित अविकसित देशों की दुनिया।“

जस्टिस काटजू ने लिखा “भारत में हमारे सभी राज्य संस्थान ध्वस्त हो गए हैं और खोखले और खाली गोले बन गए हैं। हमने संसदीय लोकतंत्र की प्रणाली को अपनाया, लेकिन जैसा कि सभी जानते हैं कि यह जाति और सांप्रदायिक वोट बैंकों में फंस कर रह गई। यदि भारत को प्रगति करनी है, तो जातिवाद और सांप्रदायिकता, जो सामंती ताकतें हैं, उन्हें नष्ट करना होगा लेकिन संसदीय लोकतंत्र उन्हें और अधिक मजबूत बनाता है। इसलिए हमें संसदीय लोकतंत्र  के स्थान पर दूसरी प्रणाली अपनानी होगी जो हमें तेजी से प्रगति करने में सक्षम बनाए।“

अवकाशप्राप्त न्यायाधीश ने आगे लिखा,“दुर्भाग्यश, आज भारत में राजनेता चुनाव जीतने के लिए जाति या धर्म पर निर्भर हैं। इस तथ्य का लाभ उठाते हुए कि हमारा समाज अभी भी जातिवाद और सांप्रदायिकता के साथ अर्ध-सामंती है, वे और वोट पाने के लिए जाति और धार्मिक घृणा फैलाते हैं, समाज को ध्रुवीकृत करते हैं, और वे ज्यादातर भ्रष्ट हैं। उनके पास कोई विचार नहीं है कि हमारी भारी आर्थिक समस्याओं को कैसे हल किया जाए, लेकिन जाति और सांप्रदायिक वोट बैंकों में हेरफेर करने के वे विशेषज्ञ हैं। जाहिर है कि ऐसे लोग भारत को एक आधुनिक, अत्यधिक औद्योगिक देश में बदलने के लिए तैयार नहीं हैं।“

उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए लिखा,“केवल आधुनिक दिमाग वाले, निस्वार्थ और देशभक्त नेता ही भारत की भारी सामाजिक-आर्थिक समस्याओं को हल कर सकते हैं। ये आधुनिक दिमाग वाले, देशभक्त नेता कौन होंगे, क्रांति कब आएगी, वे किस रूप में आएंगे, यह क्रांति किस रूप में होगी आदि का अनुमान लगाना असंभव है। लेकिन एक बात के बारे में कोई संदेह नहीं हो सकता है: हमारे देश में अगले दो दशक बहुत अशांत और खूनी होंगे। जैसा कि उर्दू के महान कवि मिर्ज़ा ग़ालिब ने कहा था, “आता है अभी देखिए क्या-क्या मेरे आगे“।“

अपने ऐतिहासिक फैसलों के लिए प्रसिद्ध रहे जस्टिस मार्कंडेय काटजू 2011 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए उसके बाद वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे। आजकल वह अमेरिका प्रवास पर कैलीफोर्निया में समय व्यतीत कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय हैं और भारत की समस्याओं पर खुलकर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।



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