प्रधानमंत्री मोदी को लिखे जीडी अग्रवाल के वो तीन पत्र, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया

Posted on 13 Oct 2018 -by Watchdog

नई दिल्ली: पिछले 112 दिनों से गंगा सफाई की मांग लेकर आमरण अनशन पर बैठे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का गुरुवार को निधन हो गया. उन्होंने गंगा नदी को अविरल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन बार पत्र लिखा था. हालांकि एक बार भी वहां से कोई भी जवाब नहीं आया.

वे अपने पत्रों में बार-बार प्रधानमंत्री को याद दिलाते रहे कि गंगा नदी को जल्द से जल्द साफ करना कितना जरूरी है. लेकिन मोदी की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई.

पहला पत्र उन्होंने उत्तरकाशी से 24 फरवरी 2018 को लिखा था, जिसमें वे गंगा की बिगड़ती स्थिति के साथ प्रधानमंत्री को साल 2014 में किए गए उनके उस वादे की याद दिलाते हैं जब बनारस में उन्होंने कहा था कि ‘मुझे मां गंगा ने बुलाया है.’

उन्होंने लिखा,भाई, प्रधानमंत्री तो तुम बाद में बने, मां गंगाजी के बेटो में मैं तुमसे 18 वर्ष बड़ा हूं. 2014 के लोकसभा चुनाव तक तो तुम भी स्वयं मां गंगाजी के समझदार, लाडले और मां के प्रति समर्पित बेटा होने की बात करते थे. पर वह चुनाव मां के आशीर्वाद और प्रभु राम की कृपा से जीतकर अब तो तुम मां के कुछ लालची, विलासिता-प्रिय बेटे-बेटियों के समूह में फंस गए हो और उन नालायकों की विलासिता के साधन (जैसे अधिक बिजली) जुटाने के लिए, जिसे तुम लोग विकास कहते हो, कभी जल मार्ग के नाम से बूढ़ी मां को बोझा ढोने वाला खच्चर बना डालना चाहते हो, कभी ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करने के लिए हल का, गाड़ी का या कोल्हू जैसी मशीनों का बैल. मां के शरीर का ढेर सारा रक्त तो ढेर सारे भूखे बेटे-बेटियों की फौज को पालने में ही चला जाता है जिन नालायकों की भूख ही नहीं मिटती और जिन्हें मां के गिरते स्वास्थ्य का जरा भी ध्यान नहीं.मां के रक्त के बल पर ही सूरमा बने तुम्हारी चाण्डाल चौकड़ी के कई सदस्यों की नज़र तो हर समय जैसे मां के बचे खुचे रक्त को चूस लेने पर ही लगी रहती है. मां जीवीत रहे या भले ही मर जाए. तुम्हारे संविधान द्वारा घोषित इन बालिगों को तो जैसे मां को मां नहीं, अपनी संपत्ति मानने का अधिकार मिल गया है. समझदार बच्चे तो नाबालिग या छोटे रहने पर भी मातृ-ऋण उतारने की, मां को स्वस्थ-सुखी रखने की ही सोचते हैं और अपने नासमझ भाई-बहनों को समाझाते भी हैं. वे कुछ नासमझ, नालायक, स्वार्थी भाई-बहनों के स्वार्थ परक हित-साधन के लिए मां पर बोझा-लादने, उसे हल, कोल्हू या मशीनों में जोतने की तो सोच भी नहीं सकते खूच चूसने की तो बात ही दूर है.तुम्हारा अग्रज होने, तुम से विद्या-बुद्धि में भी बड़ा होने और सबसे ऊपर मां गंगा जी के स्वास्थ्य-सुख-प्रसन्नता के लिए सब कुछ दांव पर लगा देने के लिए तैयार होने में तुम से आगे होने के कारण गंगा जी से संबंधित विषयों में तुम्हें समाझाने का, तुम्हें निर्देश देने का जो मेरा हक बनता है वह मां की ढेर सारी मनौतियों और कुछ अपने भाग्य और साथ में लोक-लुभावनी चालाकियों के बल पर तुम्हारे सिंहासनारूढ़ हो जाने से कम नहीं हो जाता है. उसी हक से मैं तुम से अपनी निम्न अपेक्षाएं सामने रख रहा हूं.

इसके बाद दूसरा पत्र उन्होंने हरिद्वार के कनखाल से 13 जून 2018 को लिखा. इसमें जीडी अग्रवाल ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि उनके पिछले खत का कोई जवाब नहीं मिला है. अग्रवाल ने इस पत्र में भी गंगा सफाई की मांगों को दोहराया और जल्द प्रतिक्रिया देने की गुजारिश की.

हालांकि इस पत्र का भी उनके पास कोई जवाब नहीं आया. इस बीच उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्री उमा भारती से हुई और उन्होंने फोन पर नितिन गडकरी से बात की थी. कोई भी समाधान नहीं निकलता देख उन्होंने एक बार फिर पांच अगस्त 2018 को नरेंद्र मोदी को तीसरा पत्र लिखा

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

मैंने आपको गंगाजी के संबंध में कई पत्र लिखे, लेकिन मुझे उनका कोई जवाब नहीं मिला. मुझे यह विश्वास था कि आप प्रधानमंत्री बनने के बाद गंगाजी की चिंता करेंगे, क्योंकि आपने स्वयं बनारस में 2014 के चुनाव में यह कहा था कि मुझे मां गंगा ने बनारस बुलाया है, उस समय मुझे विश्वास हो गया था कि आप शायद गंगाजी के लिए कुछ करेंगे, इसलिए मैं लगभग साढ़े चार वर्ष शान्ति से प्रतीक्षा करता रहा.आपको पता होगा ही कि मैंने गंगाजी के लिए पहले भी अनशन किए हैं तथा मेरे आग्रह को स्वीकार करते हुए मनमोहन सिंह जी ने लोहारी नागपाला जैसे बड़े प्रोजेक्ट रद्द कर दिए थे जो कि 90 प्रतिशत बन चुके थे तथा जिसमें सरकार को हजारों करोड़ की क्षति उठानी पड़ी थी, लेकिन गंगाजी के लिए मनमोहन सिंह जी की सरकार ने यह कदम उठाया था.इसके साथ ही इन्होंने भागीरथी जी के गंगोत्री जी से उत्तरकाशी तक का क्षेत्र इको-सेंसिटिव जोन घोषित करा दिया था जिससे गंगाजी को हानि पहुंच सकने वाले कार्य न हों.मेरी अपेक्षा यह थी कि आप इससे दो कदम आगे बढ़ेंगे तथा गंगाजी के लिए और विशेष प्रयास करेंगे क्योंकि आपने तो गंगा का मंत्रालय ही बना दिया था. लेकिन इन चार सालों में आपकी सरकार द्वारा जो कुछ भी हुआ उससे गंगाजी को कोई लाभ नहीं हुआ.उसकी जगह कॉरपोरेट सेक्टर और व्यापारिक घरानों को ही लाभ दिखाई दे रहे हैं. अभी तक आपने गंगा से मुनाफा कमाने की ही बात सोची है. गंगाजी को आप कुछ दे नहीं रहे हैं. ऐसा आपकी सभी योजनाओं से लगता है. कहने को आप भले ही कहें कि अब हमें गंगाजी से कुछ लेना नहीं है, उन्हें देना ही है.दिनांक 03.08.2018 को मुझसे केंद्रीय मंत्री साध्वी उमा भारती जी मिलने आई थीं. उन्होंने नितिन गडकरी जी से मेरी फोन पर बात करवाई थी, किन्तु समाधान तो आपको करना है, इसलिए मैं सुश्री उमा भारती जी को कोई जवाब नहीं दे सका. मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मेरी नीचे दी गई चार मांगों को, जो वही हैं जो मेरे आपको 13 जून 2018 को भेजे पत्र में थी, स्वीकार कर लीजिए, अन्यथा मैं गंगाजी के लिए उपवास करता हुआ आपनी जान दे दूंगा.मुझे अपनी जान दे देने में कोई चिंता नहीं है, क्योंकि गंगाजी का काम मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है. मैं आईआईटी का प्रोफेसर रहा हूं तथा मैं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं गंगाजी से जुड़ी हुई सरकारी संस्थाओं में रहा हूं. उसी के आधार पर मैं कह सकता हूं कि आपकी सरकार ने इन चार सालों में कोई भी सार्थक प्रयत्न गंगाजी को बचाने की दिशा में नहीं किया है. मेरा आपसे अनुरोध है कि मेरी इन चार मांगों को स्वीकार किया जाए. मैं आपको यह पत्र उमा भारती जी के माध्यम से भेज रहा हूं.

मेरी चार मांगे निम्न हैं…

1. गंगा जी के लिये गंगा-महासभा द्वारा प्रस्तावित अधिनियम ड्राफ्ट 2012 पर तुरन्त संसद द्वारा चर्चा कराकर पास कराना (इस ड्राफ्ट के प्रस्तावकों में मैं, एडवोकेट एम. सी. मेहता और डा. परितोष त्यागी शामिल थे ), ऐसा न हो सकने पर उस ड्राफ्ट के अध्याय–1 (धारा 1 से धारा 9) को राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा तुरन्त लागू और प्रभावी करना.

2. उपरोक्त के अन्तर्गत अलकनन्दा, धौलीगंगा, नन्दाकिनी, पिण्डर तथा मन्दाकिनी पर सभी निर्माणाधीन/प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना तुरन्त निरस्त करना और गंगाजी एवं गंगाजी की सहायक नदियों पर सभी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं को भी निरस्त किया जाए.

3. उपरोक्त ड्राफ्ट अधिनियम की धारा 4 (डी) वन कटान तथा 4(एफ) खनन, 4 (जी) किसी भी प्रकार की खुदान पर पूर्ण रोक तुरंत लागू कराना, विशेष रुप से हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में.

4. एक गंगा-भक्त परिषद का प्रोविजिनल (Provisional) गठन, (जून 2019 तक के लिए). इसमें आपके द्वारा नामांकित 20 सदस्य, जो गंगा जी और केवल गंगा जी के हित में काम करने की शपथ गंगा जी में खड़े होकर लें और गंगा से जुड़े सभी विषयों पर इसका मत निर्णायक माना जाए.प्रभु आपको सदबुद्धि दें और अपने अच्छे बुरे सभी कामों का फल भी. मां गंगा जी की अवहेलना, उन्हें धोखा देने को किसी स्थिति में माफ न करें.

मेरे द्वारा आपको भेजे गए अपने पत्र दिनांक 13 जून 2018 का कोई उत्तर या प्रतिक्रिया न पाकर मैंने 22 जून 2018 से उपवास प्रारंभ कर दिया है. इसलिए शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करने तथा धन्यवाद सहित.



प्रधानमंत्री मोदी को लिखे जीडी अग्रवाल के वो तीन पत्र, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया

Posted on 13 Oct 2018 -by Watchdog

नई दिल्ली: पिछले 112 दिनों से गंगा सफाई की मांग लेकर आमरण अनशन पर बैठे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का गुरुवार को निधन हो गया. उन्होंने गंगा नदी को अविरल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन बार पत्र लिखा था. हालांकि एक बार भी वहां से कोई भी जवाब नहीं आया.

वे अपने पत्रों में बार-बार प्रधानमंत्री को याद दिलाते रहे कि गंगा नदी को जल्द से जल्द साफ करना कितना जरूरी है. लेकिन मोदी की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई.

पहला पत्र उन्होंने उत्तरकाशी से 24 फरवरी 2018 को लिखा था, जिसमें वे गंगा की बिगड़ती स्थिति के साथ प्रधानमंत्री को साल 2014 में किए गए उनके उस वादे की याद दिलाते हैं जब बनारस में उन्होंने कहा था कि ‘मुझे मां गंगा ने बुलाया है.’

उन्होंने लिखा,भाई, प्रधानमंत्री तो तुम बाद में बने, मां गंगाजी के बेटो में मैं तुमसे 18 वर्ष बड़ा हूं. 2014 के लोकसभा चुनाव तक तो तुम भी स्वयं मां गंगाजी के समझदार, लाडले और मां के प्रति समर्पित बेटा होने की बात करते थे. पर वह चुनाव मां के आशीर्वाद और प्रभु राम की कृपा से जीतकर अब तो तुम मां के कुछ लालची, विलासिता-प्रिय बेटे-बेटियों के समूह में फंस गए हो और उन नालायकों की विलासिता के साधन (जैसे अधिक बिजली) जुटाने के लिए, जिसे तुम लोग विकास कहते हो, कभी जल मार्ग के नाम से बूढ़ी मां को बोझा ढोने वाला खच्चर बना डालना चाहते हो, कभी ऊर्जा की आवश्यकता पूरी करने के लिए हल का, गाड़ी का या कोल्हू जैसी मशीनों का बैल. मां के शरीर का ढेर सारा रक्त तो ढेर सारे भूखे बेटे-बेटियों की फौज को पालने में ही चला जाता है जिन नालायकों की भूख ही नहीं मिटती और जिन्हें मां के गिरते स्वास्थ्य का जरा भी ध्यान नहीं.मां के रक्त के बल पर ही सूरमा बने तुम्हारी चाण्डाल चौकड़ी के कई सदस्यों की नज़र तो हर समय जैसे मां के बचे खुचे रक्त को चूस लेने पर ही लगी रहती है. मां जीवीत रहे या भले ही मर जाए. तुम्हारे संविधान द्वारा घोषित इन बालिगों को तो जैसे मां को मां नहीं, अपनी संपत्ति मानने का अधिकार मिल गया है. समझदार बच्चे तो नाबालिग या छोटे रहने पर भी मातृ-ऋण उतारने की, मां को स्वस्थ-सुखी रखने की ही सोचते हैं और अपने नासमझ भाई-बहनों को समाझाते भी हैं. वे कुछ नासमझ, नालायक, स्वार्थी भाई-बहनों के स्वार्थ परक हित-साधन के लिए मां पर बोझा-लादने, उसे हल, कोल्हू या मशीनों में जोतने की तो सोच भी नहीं सकते खूच चूसने की तो बात ही दूर है.तुम्हारा अग्रज होने, तुम से विद्या-बुद्धि में भी बड़ा होने और सबसे ऊपर मां गंगा जी के स्वास्थ्य-सुख-प्रसन्नता के लिए सब कुछ दांव पर लगा देने के लिए तैयार होने में तुम से आगे होने के कारण गंगा जी से संबंधित विषयों में तुम्हें समाझाने का, तुम्हें निर्देश देने का जो मेरा हक बनता है वह मां की ढेर सारी मनौतियों और कुछ अपने भाग्य और साथ में लोक-लुभावनी चालाकियों के बल पर तुम्हारे सिंहासनारूढ़ हो जाने से कम नहीं हो जाता है. उसी हक से मैं तुम से अपनी निम्न अपेक्षाएं सामने रख रहा हूं.

इसके बाद दूसरा पत्र उन्होंने हरिद्वार के कनखाल से 13 जून 2018 को लिखा. इसमें जीडी अग्रवाल ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि उनके पिछले खत का कोई जवाब नहीं मिला है. अग्रवाल ने इस पत्र में भी गंगा सफाई की मांगों को दोहराया और जल्द प्रतिक्रिया देने की गुजारिश की.

हालांकि इस पत्र का भी उनके पास कोई जवाब नहीं आया. इस बीच उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्री उमा भारती से हुई और उन्होंने फोन पर नितिन गडकरी से बात की थी. कोई भी समाधान नहीं निकलता देख उन्होंने एक बार फिर पांच अगस्त 2018 को नरेंद्र मोदी को तीसरा पत्र लिखा.आदरणीय प्रधानमंत्री जी,मैंने आपको गंगाजी के संबंध में कई पत्र लिखे, लेकिन मुझे उनका कोई जवाब नहीं मिला. मुझे यह विश्वास था कि आप प्रधानमंत्री बनने के बाद गंगाजी की चिंता करेंगे, क्योंकि आपने स्वयं बनारस में 2014 के चुनाव में यह कहा था कि मुझे मां गंगा ने बनारस बुलाया है, उस समय मुझे विश्वास हो गया था कि आप शायद गंगाजी के लिए कुछ करेंगे, इसलिए मैं लगभग साढ़े चार वर्ष शान्ति से प्रतीक्षा करता रहा.आपको पता होगा ही कि मैंने गंगाजी के लिए पहले भी अनशन किए हैं तथा मेरे आग्रह को स्वीकार करते हुए मनमोहन सिंह जी ने लोहारी नागपाला जैसे बड़े प्रोजेक्ट रद्द कर दिए थे जो कि 90 प्रतिशत बन चुके थे तथा जिसमें सरकार को हजारों करोड़ की क्षति उठानी पड़ी थी, लेकिन गंगाजी के लिए मनमोहन सिंह जी की सरकार ने यह कदम उठाया था.इसके साथ ही इन्होंने भागीरथी जी के गंगोत्री जी से उत्तरकाशी तक का क्षेत्र इको-सेंसिटिव जोन घोषित करा दिया था जिससे गंगाजी को हानि पहुंच सकने वाले कार्य न हों.मेरी अपेक्षा यह थी कि आप इससे दो कदम आगे बढ़ेंगे तथा गंगाजी के लिए और विशेष प्रयास करेंगे क्योंकि आपने तो गंगा का मंत्रालय ही बना दिया था. लेकिन इन चार सालों में आपकी सरकार द्वारा जो कुछ भी हुआ उससे गंगाजी को कोई लाभ नहीं हुआ.उसकी जगह कॉरपोरेट सेक्टर और व्यापारिक घरानों को ही लाभ दिखाई दे रहे हैं. अभी तक आपने गंगा से मुनाफा कमाने की ही बात सोची है. गंगाजी को आप कुछ दे नहीं रहे हैं. ऐसा आपकी सभी योजनाओं से लगता है. कहने को आप भले ही कहें कि अब हमें गंगाजी से कुछ लेना नहीं है, उन्हें देना ही है.दिनांक 03.08.2018 को मुझसे केंद्रीय मंत्री साध्वी उमा भारती जी मिलने आई थीं. उन्होंने नितिन गडकरी जी से मेरी फोन पर बात करवाई थी, किन्तु समाधान तो आपको करना है, इसलिए मैं सुश्री उमा भारती जी को कोई जवाब नहीं दे सका. मेरा आपसे अनुरोध है कि आप मेरी नीचे दी गई चार मांगों को, जो वही हैं जो मेरे आपको 13 जून 2018 को भेजे पत्र में थी, स्वीकार कर लीजिए, अन्यथा मैं गंगाजी के लिए उपवास करता हुआ आपनी जान दे दूंगा.मुझे अपनी जान दे देने में कोई चिंता नहीं है, क्योंकि गंगाजी का काम मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है. मैं आईआईटी का प्रोफेसर रहा हूं तथा मैं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं गंगाजी से जुड़ी हुई सरकारी संस्थाओं में रहा हूं. उसी के आधार पर मैं कह सकता हूं कि आपकी सरकार ने इन चार सालों में कोई भी सार्थक प्रयत्न गंगाजी को बचाने की दिशा में नहीं किया है. मेरा आपसे अनुरोध है कि मेरी इन चार मांगों को स्वीकार किया जाए. मैं आपको यह पत्र उमा भारती जी के माध्यम से भेज रहा हूं.

मेरी चार मांगे निम्न हैं…

1. गंगा जी के लिये गंगा-महासभा द्वारा प्रस्तावित अधिनियम ड्राफ्ट 2012 पर तुरन्त संसद द्वारा चर्चा कराकर पास कराना (इस ड्राफ्ट के प्रस्तावकों में मैं, एडवोकेट एम. सी. मेहता और डा. परितोष त्यागी शामिल थे ), ऐसा न हो सकने पर उस ड्राफ्ट के अध्याय–1 (धारा 1 से धारा 9) को राष्ट्रपति अध्यादेश द्वारा तुरन्त लागू और प्रभावी करना.

2. उपरोक्त के अन्तर्गत अलकनन्दा, धौलीगंगा, नन्दाकिनी, पिण्डर तथा मन्दाकिनी पर सभी निर्माणाधीन/प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना तुरन्त निरस्त करना और गंगाजी एवं गंगाजी की सहायक नदियों पर सभी प्रस्तावित जलविद्युत परियोजनाओं को भी निरस्त किया जाए.

3. उपरोक्त ड्राफ्ट अधिनियम की धारा 4 (डी) वन कटान तथा 4(एफ) खनन, 4 (जी) किसी भी प्रकार की खुदान पर पूर्ण रोक तुरंत लागू कराना, विशेष रुप से हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में.

4. एक गंगा-भक्त परिषद का प्रोविजिनल (Provisional) गठन, (जून 2019 तक के लिए). इसमें आपके द्वारा नामांकित 20 सदस्य, जो गंगा जी और केवल गंगा जी के हित में काम करने की शपथ गंगा जी में खड़े होकर लें और गंगा से जुड़े सभी विषयों पर इसका मत निर्णायक माना जाए.प्रभु आपको सदबुद्धि दें और अपने अच्छे बुरे सभी कामों का फल भी. मां गंगा जी की अवहेलना, उन्हें धोखा देने को किसी स्थिति में माफ न करें.

मेरे द्वारा आपको भेजे गए अपने पत्र दिनांक 13 जून 2018 का कोई उत्तर या प्रतिक्रिया न पाकर मैंने 22 जून 2018 से उपवास प्रारंभ कर दिया है. इसलिए शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करने तथा धन्यवाद सहित.




Generic placeholder image








छात्रवृत्ति घोटाला पहुंचा हाईकोर्ट, सरकार को 12 दिसंबर को जवाब देने का आदेश
07 Dec 2018 - Watchdog

अब राज्य सरकार चलाएगी सुभारती मेडिकल कॉलेज, SC के आदेश पर सील
07 Dec 2018 - Watchdog

उत्तराखंड में फिल्म ‘केदारनाथ’ पर प्रतिबंध लगा
07 Dec 2018 - Watchdog

आंबेडकर ने हिंदू धर्म क्यों छोड़ा?
07 Dec 2018 - Watchdog

‘मुख्य न्यायाधीश को कोई बाहर से कंट्रोल कर रहा था’
03 Dec 2018 - Watchdog

अशोक और बलबीर: गुजरात दंगों और अयोध्या के दो सबक
03 Dec 2018 - Watchdog

750 किलो प्याज़ बेचने पर मिले महज़ 1064 रुपये, नाराज़ किसान ने पूरा पैसा नरेंद्र मोदी को भेजा
03 Dec 2018 - Watchdog

स्थाई राजधानी को लेकर भाजपा का दोगलापन एक बार फिर से सामने आया है
30 Nov 2018 - Watchdog

दिल्ली मार्च के लिए धरतीपुत्रों ने भरी हुंकार
29 Nov 2018 - Watchdog

मोदी के पास किसानों को देने के लिए अब जुमले भी नहीं!
29 Nov 2018 - Watchdog

अयोध्या: मीडिया 1992 की तरह एक बार फिर सांप्रदायिकता की आग में घी डाल रहा है
25 Nov 2018 - Watchdog

राफेल सौदे को लेकर फ्रांस में उठी जांच की मांग, भ्रष्टाचार का मामला दर्ज
25 Nov 2018 - Watchdog

राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ जांच में दख़ल दे रहे थे अजीत डोभाल
20 Nov 2018 - Watchdog

सीबीआई विवाद: आलोक वर्मा का जवाब कथित तौर पर ‘लीक’ होने से सुप्रीम कोर्ट नाराज, सुनवाई टली
20 Nov 2018 - Watchdog

वरिष्ठ पत्रकार अनूप गैरोला नहीं रहे
19 Nov 2018 - Watchdog

क्या इस देश में अब बहस सिर्फ़ अच्छे हिंदू और बुरे हिंदू के बीच रह गई है?
17 Nov 2018 - Watchdog

गुजरात दंगों में पीएम मोदी को क्लीन चिट के खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
13 Nov 2018 - Watchdog

नोटबंदी से गरीबों का नुकसान हुआ और सूट-बूट वाले लोगों का फायदा : राहुल गांधी
13 Nov 2018 - Watchdog

अयोध्या ज़मीन विवाद मामले की जल्द सुनवाई के लिए दायर याचिका ख़ारिज
12 Nov 2018 - Watchdog

सीबीआई विवाद: निदेशक आलोक वर्मा मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित
12 Nov 2018 - Watchdog

देश में बेरोजगारी की दर दो साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची
09 Nov 2018 - Watchdog

नोटबंदी के पहले ही RBI ने निकाल दी थी मोदी के दावे की हवा
09 Nov 2018 - Watchdog

लोकसभा उपचुनाव में उपचुनाव में बीजेपी को तगड़ा झटका
06 Nov 2018 - Watchdog

मोदी सरकार ने मांगे थे 3.6 लाख करोड़ रुपये, आरबीआई ने ठुकराया
06 Nov 2018 - Watchdog

यौन उत्पीड़न के मामले को दबाता " दैनिक जागरण "
04 Nov 2018 - Watchdog

खतरे में तो ‘मीडिया’ है जनाब
04 Nov 2018 - Watchdog

राज्यपाल ने नए मुख्य न्यायाधीश आर रंगनाथन को दिलाई पद की शपथ
04 Nov 2018 - Watchdog

राफेल से भी बड़ा घोटाला है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: पी. साईनाथ
04 Nov 2018 - Watchdog

रफाल सौदा : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से विमानों की कीमत और खरीद प्रक्रिया की जानकारी मांगी
31 Oct 2018 - Watchdog

अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, जनवरी में तय होगी अगली तारीख़
29 Oct 2018 - Watchdog




प्रधानमंत्री मोदी को लिखे जीडी अग्रवाल के वो तीन पत्र, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया प्रधानमंत्री मोदी को लिखे जीडी अग्रवाल के वो तीन पत्र, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया