सावित्री बाई फुले: जिन्होंने औरतों को ही नहीं, मर्दों को भी उनकी जड़ता और मूर्खता से आज़ाद किया

Posted on 04 Jan 2019 -by Watchdog

रवीश कुमार

दो साड़ी लेकर जाती थीं. रास्ते में कुछ लोग उन पर गोबर फेंक देते थे. गोबर फेंकने वाले ब्राह्मणों का मानना था कि शूद्र-अतिशूद्रों को पढ़ने का अधिकार नहीं है.

घर से जो साड़ी पहनकर निकलती थीं वो दुर्गंध से भर जाती थी. स्कूल पहुंच कर दूसरी साड़ी पहन लेती थीं. फिर लड़कियों को पढ़ाने लगती थीं.

यह घटना 1 जनवरी 1848 के आस-पास की है. इसी दिन सावित्री बाई फुले ने पुणे शहर के भिड़ेवाडी में लड़कियों के लिए एक स्कूल खोला था. आज उनका जन्मदिन है.

आज के दिन भारत की सभी महिलाओं और पुरुषों को उनके सम्मान में उन्हीं की तरह का टीका लगाना चाहिए क्योंकि इस महिला ने स्त्रियों को ही नहीं मर्दों को भी उनकी जड़ता और मूर्खता से आज़ाद किया है.

इस साल दो जनवरी को केरल में अलग-अलग दावों के अनुसार तीस से पचास लाख औरतें छह सौ किमी रास्ते पर दीवार बन कर खड़ी थीं. 1848 में सावित्री बाई अकेले ही भारत की करोड़ों औरतों के लिए दीवार बन कर खड़ी हो गई थीं.

केरल की इस दीवार की नींव सावित्री बाई ने अकेले डाली थी. अपने पति ज्येतिबा फुले और सगुणाबाई से मिलकर.

इनकी जीवनी से गुज़रिए आप गर्व से भर जाएंगे. सावित्री बाई की तस्वीर हर स्कूल में होनी चाहिए चाहे वह सरकारी हो या प्राइवेट. दुनिया के इतिहास में ऐसे महिला नहीं हुई.

जिस ब्राह्मणवाद ने उन पर गोबर फेंके, उनके पति ज्योति बा को पढ़ने से पिता को इतना धमकाया कि पिता ने बेटे को घर से ही निकाल दिया. उस सावित्री बाई ने एक ब्राह्मण की जान बचाई जब उससे एक महिला गर्भवती हो गई. गांव के लोग दोनों को मार रहे थे. सावित्री बाई पहुंच गईं और दोनों को बचा लिया.

सावित्री बाई ने पहला स्कूल नहीं खोला, पहली अध्यापिका नहीं बनीं बल्कि भारत में औरतें अब वैसी नहीं दिखेंगी जैसी दिखती आई हैं, इसका पहला जीता जागता मौलिक चार्टर बन गईं.

उन्होंने भारत की मरी हुई और मार दी गई औरतों को दोबारा से जन्म दिया. मर्दों का चोर समाज पुणे की विधवाओं को गर्भवती कर आत्महत्या के लिए छोड़ जाता था. सावित्री बाई ने ऐसी गर्भवती विधवाओं के लिए जो किया है उसकी मिसाल दुनिया में शायद ही हो.

‘1892 में उन्होंने महिला सेवा मंडल के रूप में पुणे की विधवा स्त्रियों के आर्थिक विकास के लिए देश का पहला महिला संगठन बनाया. इस संगठन में हर 15 दिनों में सावित्रीबाई स्वयं सभी गरीब दलित और विधवा स्त्रियों से चर्चा करतीं, उनकी समस्या सुनती और उसे दूर करने का उपाय भी सुझाती.’

मैंने यह हिस्सा फार्वर्ड प्रेस में सुजाता पारमिता के लेख से लिया है. सुजाता ने सावित्रीबाई फुले का जीवन-वृत विस्तार से लिखा है. आप उसे पढ़िए और शिक्षक हैं तो क्लासरूम में पढ़ कर सुनाइये. ये हिस्सा ज़ोर-ज़ोर से पढ़िए.

‘फुले दम्पत्ति ने 28 जनवरी 1853 में अपने पड़ोसी मित्र और आंदोलन के साथी उस्मान शेख के घर में बाल हत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की. जिसकी पूरी जिम्मेदारी सावित्रीबाई ने संभाली.

वहां सभी बेसहारा गर्भवती स्त्रियों को बगैर किसी सवाल के शामिल कर उनकी देखभाल की जाती उनकी प्रसूति कर बच्चों की परवरिश की जाती जिसके लिए वहीं पालना घर भी बनाया गया. यह समस्या कितनी विकराल थी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र 4 सालों के अंदर ही 100 से अधिक विधवा स्त्रियों ने इस गृह में बच्चों को जन्म दिया.’

दुनिया में लगातार विकसित और मुखर हो रही नारीवादी सोच की ऐसी ठोस बुनियाद सावित्रीबाई और उनके पति ज्योतिबा ने मिलकर डाली. दोनों ऑक्सफोर्ड नहीं गए थे. बल्कि कुप्रथाओं को पहचाना, विरोध किया और समाधान पेश किया.

मैंने कुछ नया नहीं लिखा है. जो लिखा था उसे ही पेश किया है. बल्कि कम लिखा है. इसलिए लिखा है ताकि हम सावित्रीबाई फुले को सिर्फ डाक टिकटों के लिए याद न करें.

याद करें तो इस बात के लिए कि उस समय का समाज कितना घटिया और निर्दयी था, उस अंधविश्वासी समाज में कोई तार्किक और सह्रदयी एक महिला भी थी जिसका नाम सावित्री बाई फुले था.

(यह लेख मूल रूप से रवीश कुमार के फेसबुक पेज पर प्रकाशित हुआ है.)



Generic placeholder image


आचार संहिता लागू होने से एक दिन पहले भाजपा को दिल्ली में मिली दो एकड़ ज़मीन
20 Mar 2019 - Watchdog

जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष भारत में लोकपाल के पहले अध्यक्ष नियुक्त
20 Mar 2019 - Watchdog

पुण्य प्रसून की ‘सूर्या समाचार’ से छुट्टी!
19 Mar 2019 - Watchdog

नरेंद्र मोदी का ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान महज़ पाखंड है
19 Mar 2019 - Watchdog

गोवा के मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन
18 Mar 2019 - Watchdog

मोदी की बड़ी रणनीतिक भूल है “मैं भी चौकीदार हूं!”
17 Mar 2019 - Watchdog

जस्टिस घोष होंगे देश के पहले लोकपाल
17 Mar 2019 - Watchdog

IAS छोड़ राजनीति में आए शाह फैसल ने लॉन्च की अपनी पार्टी
17 Mar 2019 - Watchdog

बीजेपी को बड़ा झटका, पूर्व सीएम बीसी खंडूरी के बेटे मनीष खंडूरी कांग्रेस में शामिल
16 Mar 2019 - Watchdog

बच्चों के हर्ष व उल्लास का त्योहार है फूलदेई
15 Mar 2019 - Watchdog

सर्वोच्च न्यायालय का वीवीपैट को लेकर दाखिल 21 विपक्षी दलों की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस
15 Mar 2019 - Watchdog

मसूद अजहर संबंधी नाकामी भी नेहरू के मत्थे!
15 Mar 2019 - Watchdog

न्यूज़ीलैंडः दो मस्जिदों में गोलीबारी, 40 लोगों की मौत
15 Mar 2019 - Watchdog

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के नाम प्रो. शम्सुल इस्लाम का खुला पत्र
13 Mar 2019 - Watchdog

नोटबंदी से पहले आरबीआई ने कहा था, नोट बैन से ख़त्म नहीं होगा काला धन
12 Mar 2019 - Watchdog

गोदी मीडिया का बहिष्कार करे विपक्ष
11 Mar 2019 - Watchdog

देश में आज से आचार संहिता लागू, सभी मतदान केंद्रों पर VVPT का होगा इस्तेमाल
10 Mar 2019 - Watchdog

युद्धोन्मादी अन्धराष्ट्रवाद के ख़िलाफ़ दहाड़कर बोलना होगा ! चुप्पी कायरता है !
10 Mar 2019 - Watchdog

लोकसभा चुनावों में धनबल, हिंसा और नफ़रत का बोलबाला होगा: पूर्व सीईसी
10 Mar 2019 - Watchdog

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, अमेरिका भारत को व्यापार में तरजीह देने का दर्जा वापस लेगा
05 Mar 2019 - Watchdog

कश्मीरियों पर नहीं बल्कि लखनवी तहजीब पर हमला है!
09 Mar 2019 - Watchdog

बयान से पलटे अटॉर्नी जनरल, कहा- रक्षा मंत्रालय से चोरी नहीं हुए रफाल दस्तावेज़
09 Mar 2019 - Watchdog

राजस्थान में भारतीय वायु सेना का मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त
08 Mar 2019 - Watchdog

14 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंची कृषि आय
03 Mar 2019 - Watchdog

बातचीत से सुलझेगा अयोध्या विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामला मध्यस्थता के लिए सौंपा
08 Mar 2019 - Watchdog

राफेल सौदे में रंगे हाथों पकड़ी गई चौकीदार की चोरी, दर्ज हो एफआईआर: कांग्रेस
06 Mar 2019 - Watchdog

बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद का मदरसा अब भी खड़ा है : रॉयटर्स
06 Mar 2019 - Watchdog

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, राफेल से जुड़े दस्तावेज चोरी
06 Mar 2019 - Watchdog

भाजपा के दोबारा सत्ता में न आने पर संसद पर हमला कर देगा पाकिस्तान
04 Mar 2019 - Watchdog

देशभक्ति इसे कहते हैं जो Altnews करके दिखाता है
02 Mar 2019 - Watchdog


सावित्री बाई फुले: जिन्होंने औरतों को ही नहीं, मर्दों को भी उनकी जड़ता और मूर्खता से आज़ाद किया