साध्वी प्रज्ञा को प्रत्याशी बना भाजपा देखना चाहती है कि हिंदुओं को कितना नीचे घसीटा जा सकता है

Posted on 18 Apr 2019 -by Watchdog

अपूर्वानंद-thewire

साध्वी कहलाने वाली प्रज्ञा सिंह को भोपाल लोकसभा चुनाव क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित करके भारतीय जनता पार्टी ने यह साबित कर दिया है कि क़ानून पर आधारित समाज के उसूल में उसका कोई यकीन नहीं है.

प्रज्ञा सिंह मालेगांव दहशतगर्द हमले की अभियुक्त हैं. दिसंबर 2017 में मुंबई की अदालत ने उन्हें इस मामले से बरी किए जाने की उनकी अर्जी को खारिज कर दिया था. यह तब, जब खुद नेशनल इनवेस्टिगेटिव एजेंसी (एनआईए) ने अदालत के सामने प्रज्ञा सिंह की संलिप्तता पर संदेह व्यक्त किया था.

प्रज्ञा ठाकुर पर आरोप है कि मालेगांव आतंकवादी हमले में उनकी मोटर साइकिल का इस्तेमाल किया गया था. अदालत का कहना था कि न सिर्फ उनकी मोटर साइकिल का इस्तेमाल बल्कि इस हमले की साजिश में भी उनके शामिल होने के प्रमाण हैं.

यह साजिश थी ऐसी जगहों पर हमलों की, जहां मुसलमान ज़्यादा तादाद में हों. अदालत ने कहा था कि इस तरह की साजिश में किसी खुले प्रमाण का मिलना असंभव है और खुली अदालत में इसकी पूरी जांच की जानी चाहिए.

उसके पहले इंडियन एक्सप्रेस को एक इंटरव्यू में सरकारी वकील रोहिणी सालियान बता चुकी थीं कि एनआईए उन पर अभियुक्तों के खिलाफ मामले को कमजोर करने के लिए दबाव डाल रही थी. वे इसी वजह से इस मुक़दमे से अलग भी हो गईं.

समझौता एक्सप्रेस पर आतंकवादी हमले के मामले में अभियुक्तों को बरी करते हुए न्यायाधीश ने अफ़सोस जताया था कि एनआईए ने सबूत कायदे से पेश नहीं किए. न्यायाधीश की टिप्पणी से निष्कर्ष निकालना मुश्किल नहीं कि एजेंसी ने मामले को कमजोर किया जिससे अभियुक्त बरी हो जाएं.

प्रज्ञा सिंह, कर्नल पुरोहित आदि की गिरफ्तारी के पीछे पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे की बारीक पड़ताल और जीवट भरी जांच थी. उन्होंने सुराग इकट्ठे किए और मालेगांव हमले में शामिल लोगों के बीच रिश्तों के तार मिलाते हुए साजिश की तस्वीर खींची. प्रज्ञा सिंह इसका एक अहम हिस्सा थीं.

करकरे के खिलाफ भी शिवसेना और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संगठनों ने घृणा अभियान चलाया. यह कहकर कि आखिर हिंदू कैसे आतंकवादी हमले में शामिल हो सकते हैं?

यह याद रखने की ज़रूरत है कि आतंकवादी हिंसा भी हिंसा ही है. क्या हिंदुओं में गुंडे, हत्यारे नहीं? आतंकवाद एक ऐसी हिंसा है जिसे, जितने लोग उस वक्त हिंसा की जद में आते हैं, उनसे कहीं अधिक बड़ी आबादी को दहशत में डालने के मकसद से किया जाता है.

फिर मालेगांव या समझौता एक्सप्रेस की हिंसा के अभियुक्तों के लिए भाजपा क्यों दलील दे रही है?

उनके लिए जमानत मांगते हुए उनके प्रति अदालत की दया उपजाने के लिए उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम और बीमार बताया गया था. उनकी उम्मीदवारी के ऐलान पर मालेगांव हमले के शिकार लोगों के वकील ने कहा कि अब वे कैसे चुनाव प्रचार के योग्य हो गई हैं!

क्या हमें प्रज्ञा सिंह के भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रत्याशी चुने जाने पर हैरानी है? क्या हमें इससे उबकाई आ रही है कि अब संसद में ऐसे लोग पहुंच सकते हैं? क्या यह सभ्यता के विरुद्ध लग रहा है?

बाबरी मस्जिद के ध्वंस के 27 साल हो गए. वह एक अजब आतंकवादी हमला था जिसका इंतज़ार देश की सरकारें और न्यायपालिका भी कर रही थीं. उस दहशतगर्द कार्रवाई का जिम्मा लेने वाले बाल ठाकरे को मौत के बाद राष्ट्रीय सम्मान दिया गया.

बाबरी मस्जिद ध्वंस अभियान के नेता को हमने देश का उपप्रधानमंत्री बनते हुए देखा. और उसके बाद गुजरात जनसंहार के नायक को प्रधानमंत्री बनते हुए भी. लेकिन उसके भी पहले भारत के सबसे सम्मानित व्यक्ति गांधी की हत्या के षड्यंत्र में शामिल लेकिन सीधे सबूत के अभाव में छूट निकलने वाले सावरकर की तस्वीर संसद में सादर लगाई गई.

फिर देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री एक ऐसे व्यक्ति को बनाया गया, जो अपने मुसलमान विरोध को खुलकर व्यक्त करता है और इसका आनंद भी लेता है. अब आश्चर्य क्यों?

लोग कह रहे हैं कि चूंकि इस चुनाव में भाजपा का भरोसा छूट रहा है, उसने ब्रह्मास्त्र चलाया है. इससे हिंदुओं का अपनी ओर ध्रुवीकरण कर पाने में वह कामयाब रहेगी, ऐसा उसे यकीन है. प्रज्ञा सिंह ने इस चुनाव को ‘धर्म युद्ध’ कहा है. वे भगवा को सम्मान दिलाने का संकल्प कर रही हैं.

यह परीक्षा वास्तव में भारतीय जनता पार्टी की नहीं है. यह पार्टी हिंदुओं का अपमान कर रही है. वह उनकी परीक्षा ले रही है. वह यह देखना चाहती है कि उन्हें कितना नीचे घसीटा जा सकता है. यह हिंदुओं का इम्तिहान है.

क्या वे धर्म के इस अर्थ को स्वीकार करने को तैयार हैं? और क्या वे भाजपा के साथ नीचे और नीचे गिरते जाने को भी तैयार हैं?()

(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाते हैं.)



Generic placeholder image


मजदूरी करती रहें महिलायें इसलिए निकाल दिया तकरीबन 5 हजार का गर्भाशय
20 Jun 2019 - Watchdog

नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाने वाले पूर्व IPS संजीव भट्ट को तीस साल पुराने मामले में उम्रकैद
20 Jun 2019 - Watchdog

मोदी सरकार ने चुपके से बदली पर्यावरण नीति
12 Jun 2019 - Watchdog

पत्रकार का आरोप- रेलवे के पुलिसकर्मियों ने मेरे मुंह में पेशाब की
12 Jun 2019 - Watchdog

सख्त हुआ ये राज्य, रेप करने वालों को लगेंगे नपुंसक बनाने के इंजेक्शन
12 Jun 2019 - Watchdog

आंकड़ों की इस धोखेबाज़ी की बाकायदा जांच होनी चाहिए
11 Jun 2019 - Watchdog

उत्तराखंड के वित्त मंत्री प्रकाश पंत का निधन
06 Jun 2019 - Watchdog

कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले ऑफिसर विदेशी घोषित, परिवार समेत नज़रबंदी शिविर भेजा गया
03 Jun 2019 - Watchdog

वाम नेतृत्व को अपना खोल पलटने की ज़रूरत है
03 Jun 2019 - Watchdog

नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली
31 May 2019 - Watchdog

मोदी मंत्रिमंडल: अमित शाह बने गृह मंत्री, राजनाथ रक्षा मंत्री और एस. जयशंकर विदेश मंत्री
31 May 2019 - Watchdog

30 मई को ईवीएम के खिलाफ राष्ट्रीय विरोध दिवस
29 May 2019 - Watchdog

भाजपा को 300 से ज़्यादा सीटें मिलने की संभावना, मोदी ने कहा- एक बार फिर भारत जीता
23 May 2019 - Watchdog

ये सर्वे खतरनाक और किसी बडी साजिश का हिस्सा लगते हैं
20 May 2019 - Watchdog

डर पैदा कर रहे हैं एक्गिट पोल के नतीजे
20 May 2019 - Watchdog

न्यूज़ चैनल भारत के लोकतंत्र को बर्बाद कर चुके हैं
19 May 2019 - Watchdog

प्रधानमंत्री की केदारनाथ यात्रा मतदान प्रभावित करने की साजिश : रवीश कुमार
19 May 2019 - Watchdog

अर्थव्यवस्था मंदी में धकेली जा चुकी है और मोदी नाकटबाजी में मग्न हैं
19 May 2019 - Watchdog

भक्ति के नाम पर अभिनय कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
18 May 2019 - Watchdog

चुनाव आयोग में बग़ावत, आयोग की बैठकों में शामिल होने से आयुक्त अशोक ल्वासा का इंकार
18 May 2019 - Watchdog

पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी बिना सवाल-जवाब के लौटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
17 May 2019 - Watchdog

प्रज्ञा ठाकुर ने नाथूराम गोडसे को बताया 'देशभक्त'
16 May 2019 - Watchdog

प्रज्ञा ठाकुर ने नाथूराम गोडसे को बताया 'देशभक्त'
16 May 2019 - Watchdog

छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद चार हजार से ज्यादा आदिवासी जल्द ही होंगे रिहा
15 May 2019 - Watchdog

खराब गोला-बारूद से हो रहे हादसों पर सेना ने जताई चिंता
15 May 2019 - Watchdog

मोदी की रैली के पास पकौड़ा बेचने पर 12 स्टूडेंट हिरासत में लिए
15 May 2019 - Watchdog

भारत माता हो या पिता मगर उसकी डेढ़ करोड़ संतानें वेश्या क्यों हैं ?
14 May 2019 - Watchdog

सुपरफास्ट मोदी: 1988 में अपना पहला ईमेल भेज चुके थे बाल नरेंद्र, जबकि भारत में 1995 में शुरू हुई Email की सुविधा
13 May 2019 - Watchdog

आजाद भारत का पहला आतंकी नाथूराम गोडसे हिंदू था
13 May 2019 - Watchdog

सीजेआई यौन उत्पीड़न मामला: शिकायतकर्ता ने कहा- ‘हम सब खो चुके हैं, अब कुछ नहीं बचा’
13 May 2019 - Watchdog



साध्वी प्रज्ञा को प्रत्याशी बना भाजपा देखना चाहती है कि हिंदुओं को कितना नीचे घसीटा जा सकता है