व्यापारी हत्या मामले में हिंदू महासभा की नेता पूजा शकुन पांडे गिरफ़्तार

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ व्यापारी हत्या मामले में मुख्य आरोपी अखिल भारत हिंदू महासभा (एबीएचएम) की पदाधिकारी पूजा शकुन पांडे को पुलिस ने शनिवार (11 अक्टूबर) को राजस्थान के भरतपुर से गिरफ्तार कर लिया है.

मालूम हो कि 25 वर्षीय बाइक शोरूम के मालिक अभिषेक गुप्ता की बीते महीने 26 सितंबर को अलीगढ़ के रोरावर इलाके में दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, जब वह हाथरस जाने वाली बस में सवार हो रहे थे.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पूजा शकुन पांडे और उनके पति, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीएचएम) के प्रवक्ता अशोक पांडे ने कथित तौर पर गुप्ता की हत्या के लिए दो शूटरों, मोहम्मद फजल और आसिफ को सुपारी दी थी.

रोरावर पुलिस स्टेशन में हत्या वाली रात ही पूजा और उनके पति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था.

अन्य आरोपी सलाखों के पीछे

इस मामले में अशोक पांडे और दोनों शूटर पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

महामंडलेश्वर की धार्मिक उपाधि का दावा करने वाली पूजा शकुन पांडे हत्या की रात से ही फरार थीं और उन पर 50,000 रुपये का इनाम था.

भरतपुर में गिरफ्तारी के बाद, पूजा को अलीगढ़ लाया गया और उनसे पूछताछ जारी है.

इस मामले में जांचकर्ताओं ने पहले खुलासा किया था कि दोनों शूटर पूजा शकुन पांडे और उसके पति को 7-8 सालों से जानते थे और एक महीने पहले ही उनके घर पर वेल्डिंग का काम कर रहे थे.

इसी दौरान पति-पत्नी की जोड़ी ने कथित तौर पर अभिषेक गुप्ता की हत्या के लिए उन्हें पैसे दिए.

ऐसा बताया जा रहा है कि पूजा शकुन पांडे ने हत्या से पहले हत्यारों को व्यापारी गुप्ता की तस्वीर उपलब्ध कराई थी.

कॉल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पुलिस ने बताया कि अशोक पांडे ने अगस्त और सितंबर के बीच शूटर फज़ल से 27 बार संपर्क किया था और अपनी फरार पत्नी से 11 बार बात की थी.

उल्लेखनीय है कि द वायर को प्राप्त एफआईआर के अनुसार, 26 सितंबर को मृतक अभिषेक गुप्ता, उनके पिता नीरज गुप्ता और उनके चचेरे भाई जीतू गुप्ता शाम को सामान्य समय पर शोरूम बंद कर गए थे. वे एक चौराहे पर बस का इंतज़ार कर रहे थे. पिता और चचेरे भाई बस में चढ़ गए, लेकिन अभिषेक को बाइक सवार दो लोगों ने रोका और उस पर गोली चलाकर मौके से भाग गए. अभिषेक के सिर में गंभीर चोट आई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई.

गुप्ता के पिता ने अपनी शिकायत में पूजा शकुन पांडे और उनके पति अशोक का नाम लेते हुए कहा था कि उनके और उनके बेटे के बीच संबंध तनावपूर्ण थे.

ज्ञात हो कि पूजा शकुन पांडे इससे पहले महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करने के कारण सुर्खियों में आई थीं.

पूजा शकुन पांडेय कौन हैं?

पूजा शकुन पांडेय उर्फ ​​साध्वी अन्नपूर्णा उर्फ ​​लेडी गोडसे अलीगढ़ में हिंदू महासभा की एक प्रमुख नेता हैं और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर नफरती भाषा का प्रयोग करने के लिए अक्सर सुर्खियों में रहती हैं. उन्होंने अपने हिंसक भाषणों और ‘हिंदुओं की रक्षा’ के लिए चलाए गए अभियानों से अपनी अलग पहचान बनाई है, जिसे वे मुसलमानों से आसन्न खतरा मानती हैं.

2021 में उन्होंने मोदी के खिलाफ अपनी टिप्पणियों के लिए सुर्खियां बटोरीं, जब उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के एक साल से चल रहे विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर तीन कृषि कानूनों को निरस्त करेगी. पूजा शकुन ने हिंदू महासभा के अलीगढ़ कार्यालय से मोदी की तस्वीर यह कहते हुए हटवा दी थी, ‘जिसकी एक बात नहीं, उसका एक बाप नहीं.’

अप्रैल 2020 में पूजा शकुन के खिलाफ धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सार्वजनिक उपद्रव को बढ़ावा देने वाला बयान जारी करने के आरोप में एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था. उस वीडियो के वायरल होने के बाद – जिसमें उन्होंने कथित तौर पर तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणी की थी, उन्हें कुछ समय के लिए गिरफ्तार भी किया गया था.

2021 में हरिद्वार में आयोजित कुख्यात धर्म संसद में मुसलमानों के नरसंहार का खुला आह्वान किया गया था, पूजा शकुन ने हथियार उठाने और नरसंहार के लिए उकसाने का भी आह्वान किया था.

बिना किसी लाग-लपेट के उन्होंने मुसलमानों के सामूहिक नरसंहार का सीधा आह्वान किया था.

उन्होंने कहा था, ‘हथियारों के बिना कुछ भी संभव नहीं है. अगर आप उनकी आबादी खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें मार डालो. मारने के लिए तैयार रहो और जेल जाने के लिए भी तैयार रहो. अगर हममें से 100 लोग भी उनमें से 20 लाख (मुसलमानों) को मारने के लिए तैयार हों, तो हम जीतेंगे और जेल जाएंगे… (नाथूराम) गोडसे की तरह मैं बदनाम होने के लिए तैयार हूं, लेकिन मैं अपने हिंदुत्व की रक्षा के लिए हर उस राक्षस से हथियार उठाऊंगी जो मेरे धर्म के लिए खतरा है.’

कई मौकों पर मुसलमानों की हत्या का खुला आह्वान करने के बावजूद पूजा शकुन को शायद ही किसी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.

कट्टरपंथ की कहानी

बताया गया है कि अभिषेक पहली बार पूजा शकुन के संपर्क में तब आए थे जब वह मुश्किल से 17 साल के थे. उनके पिता नीरज गुप्ता ने अपने बेटे की देखभाल के लिए उस पर भरोसा किया था, लेकिन जल्द ही स्थिति खराब हो गई जब पूजा शकुन ने कथित तौर पर परिवार से 5 लाख रुपये का कर्ज ले लिया.

जब नीरज ने पूजा शकुन से पैसे वापस करने के लिए कहा, तो कथित तौर पर उन्होंने और भी ज़्यादा पैसे मांगे क्योंकि उनका दावा था कि नीरज का बेटा किसी लड़की के चक्कर में है. कथित तौर पर 8 लाख रुपये से ज़्यादा चुकाने के बाद परिवार पहले से ही पूजा शकुन से सावधान था.

2019 में उनके बेटे की गिरफ़्तारी तब हुई जब एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पूजा शकुन महात्मा गांधी के पुतले पर गोली चला रही थीं और उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे के समर्थन में नारे लगा रही थीं. बाद में उन्होंने उस पुतले को आग लगा दी.

हालांकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूजा शकुन से अपने संबंधों को खारिज कर दिया था, लेकिन वह पूर्व भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा जैसे पार्टी नेताओं के साथ नियमित रूप से बातचीत करती हैं और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ उनकी तस्वीरें भी हैं. मई 2019 में पूजा शकुन एक और विवाद में तब घिरी थीं जब उन्होंने सावरकर जयंती पर नाबालिग लड़कियों को खंजर बांटे थे.

मृतक के भाई आशीष ने द वायर को बताया कि गांधीजी के पुतले को गोली मारने के मामले में अभिषेक के जेल जाने के बाद उनकी मां उसे वापस लाना चाहती थी और वह इसमें आंशिक रूप से सफल भी रहीं. लेकिन जल्द ही अभिषेक पूजा शकुन के घर लौट गए.

उन्होंने कहा, ‘पिछले दो सालों से हमें मेरे भाई और पूजा शकुन के बीच प्रेम-प्रसंग की भनक लग रही थी. मेरी मां हमेशा से उसे वापस लाना चाहती थीं, खासकर गांधीजी के पुतले वाली घटना के बाद. हालांकि, हाल के महीनों में मेरे भाई ने दूरी बनानी शुरू कर दी थी और उसके फ़ोन कॉल्स नहीं उठा रहा था. उसने नौकरी कर ली और पिछली दिवाली पर उसने घर पर 3.5 लाख रुपये भी दिए. वह लगातार वीडियो कॉल करके उसकी लोकेशन पता करती रहती थी.’

लेकिन जैसे-जैसे अभिषेक ने पूजा शकुन से दूरी बनानी शुरू की, धीरे-धीरे अजीबोगरीब चीज़ें होने लगीं. आशीष ने बताया, ‘वह लगातार उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही थी. गुंडों ने उस पर हमला किया और फिर उसे झूठे केस में फंसाने की कोशिश की गई.’

‘अगर ये लोग मुसलमानों को निशाना बनाना बंद कर दें, तो कोई उनकी तरफ़ नहीं देखेगा’

कथित तौर पर पूजा शकुन बाइक शोरूम के मालिकाना हक में हिस्सा चाहती थी. ‘वह जानती थी कि ऐसा करके वह अब भी उसके संपर्क में रह सकती है.’

आशीष ने द वायर को बताया कि अभिषेक पूजा से मिलने से पहले अपने पैसे छिपा लेता था. उन्होंने आरोप लगाया, ‘रात में वह उसे अपने साथ सोने के लिए मजबूर करती थी. मेरे भाई की हत्या वासना और लालच के कारण हुई.’

पूजा शकुन द्वारा चलाए गए विभिन्न अभियानों के बारे में पूछे जाने पर आशीष ने आरोप लगाया कि पूजा ने निजी तौर पर स्वीकार किया कि उसने ऐसा सुर्खियां बटोरने और ‘टीआरपी’ पाने के लिए किया था.

उन्होंने कहा, ‘अगर ये लोग मुसलमानों को निशाना बनाना बंद कर दें, तो कोई उनकी तरफ़ नहीं देखेगा. मुसलमान हमारे काम में योगदान देते हैं. वे मैकेनिक और टेकनीशियन के तौर पर काम करते हैं. हमारे तीन मैकेनिक मुसलमान हैं. उन्होंने (मुसलमानों ने) हमें कभी कोई नुकसान नहीं पहुंचाया. उसने हमारे भाई को मार डाला.’

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